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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ramayan Circuit: Ram Van Gaman Path will be connected with Ramayana Circuit, preparations to be put on tourism

Ramayan Circuit : रामायण सर्किट से जुड़ेगा राम वन गमन पथ, पर्यटन मानचित्र पर उभारने की तैयारी

Thu, 15 Jun 2023 05:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Jun 2023 05:03 PM IST
सार

शासन की ओर से संगमनगरी के सांस्कृतिक पर्यटन विकास के लिए कार्ययोजना बनाने के लिए पत्र जारी किया गया है। इसके बाद अफसर रामायण सर्किट की रूपरेखा बनाने के लिए मंथन कर रहे हैं। मंडलायुक्त ने कार्ययोजना बनाने के लिए कहा है।

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Ramayan Circuit: Ram Van Gaman Path will be connected with Ramayana Circuit, preparations to be put on tourism
रामायण सर्किट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अयोध्या में विश्व का अद्वितीय श्रीराम मंदिर बनने के साथ ही वन गमन पथ को रामायण सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। रामनगरी की तर्ज पर संगमनगरी के तीर्थाटन विकास के लिए भगवान प्रभु राम से जुड़े स्थलों को चिह्नित करने के साथ ही उन्हें रामायण सर्किट के रूप में पर्यटन के मानचित्र पर उभारा जाएगा। इसके लिए तैयार कर ली गई है।

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शासन की ओर से संगमनगरी के सांस्कृतिक पर्यटन विकास के लिए कार्ययोजना बनाने के लिए पत्र जारी किया गया है। इसके बाद अफसर रामायण सर्किट की रूपरेखा बनाने के लिए मंथन कर रहे हैं। मंडलायुक्त ने कार्ययोजना बनाने के लिए कहा है। इसके बाद पर्यटन विभाग ने इतिहासकारों, कलाविदों के साथ मंथन शुरू कर दिया है। राम वन गमन पथ को लेकर पहले भी अध्ययन और शोध किए जा चुके हैं। इसलिए इस योजना को साकार करने के लिए इतिहासकारों की मदद ली जा रही है।

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कला-संस्कृति के विशेषज्ञों के साथ भी मंथन शुरू कर दिया गया है, ताकि रामायण सर्किट को मूर्त रूप दिया जा सके। पर्यटन विभाग के अधिकारी रामायण सर्किट के साथ ही वाल्मीकि सर्किट बनाने के लिए स्थलों को चिह्नित कर ऐसे सांस्कृतिक महत्व के स्थानों का पता लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अब तक अयोध्या से रामेश्वरम तक प्रस्तावित राम वन गमन मार्ग का प्रयागराज से सीधा जुड़ाव नहीं हो सका है। जबकि, पौराणिक कथाओं के अनुसार वन गमन के दौरान भगवान राम के प्रयागराज में महर्षि भरद्वाज के आश्रम के अलावा संगम पर भी पूजा-अर्चना के प्रमाण मिल चुके हैं।

ऐसे में अब रामायण सर्किट बनाने की दिशा में पहल तेज हो गई है। इसके अलावा विस्तृत रूपरेखा के साथ पर्यटन विकास के लिए भी सुझाव सांस्कृतिक विशेषज्ञों से मांगे गए हैं। आध्यात्मिक पर्यटन के विकास के लिए सर्किट को विकसित करने के साथ ही महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए एक ग्रीन फील्ड टाउनशिप विकसित करने की भी योजना है। रामायण सर्किट की एयरपोर्ट से बेहतर कनेक्टिविटी बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि देश-दुनिया के पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों का ध्यान खींचा जा सके।

सर्किट के लिए इतिहासकारों से साधा गया संपर्क

रामायण सर्किट के लिए इतिहासकारों से संपर्क साधा गया है। पर्यटन और संस्कृति विभाग के अधिकारी कला-संस्कृति और इतिहास के जानकारों की मदद ले रहे हैं, ताकि कोई पक्ष छूटने न पाए। पर्यटन विभाग के अफसर इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकार प्रो. डीपी दुबे, एनसीजेडसीसी के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा और क्षेत्रीय अभिलेखागार अधिकारी गुलाम सरवर के साथ चर्चा कर चुके हैं।

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