राजू पाल हत्याकांड : गवाह के घरवालों को घेरने की कोशिश नाकाम, केस स्पंज
मुकदमा चार जून को कर्नलगंज थाने में बिरजू निषाद निवासी बख्शीमोढ़ा करेली ने दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि वह अपने भाई लौटन निषाद की हत्या के मामले में गवाही के लिए 30 मई को पत्नी संतोषी संग आया था।
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राजूपाल हत्याकांड की गवाह रुखसाना के घरवालों पर दर्ज रिपोर्ट झूठी निकली। कोर्ट परिसर में हत्या के गवाह को धमकाने व एक करोड़ रंगदारी मांगने के आरोप पेशबंदी में लगाए गए थे। जिसके बाद कर्नलगंज पुलिस ने इस मामले में दर्ज मुकदमा स्पंज कर दिया है।
मुकदमा चार जून को कर्नलगंज थाने में बिरजू निषाद निवासी बख्शीमोढ़ा करेली ने दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि वह अपने भाई लौटन निषाद की हत्या के मामले में गवाही के लिए 30 मई को पत्नी संतोषी संग आया था। वापस निकलते वक्त नूर अख्तर, सादिक, सेबू उर्फ शाजिद व जाकिर अली ने गवाही देने पर जान से मारने की धमकी देने व एक करोड़ रंगदारी मांगी। शिकायत पर कर्नलगंज पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। इस केस में नामजद नूर राजूपाल हत्याकांड की गवाह रुखसाना का भाई, सादिक पति व शेबू बेटा है।
खास बात यह है कि हफ्ते भर पहले ही करेली थाने में नूर अख्तर ने अतीक के करीबी मुबारक प्रधान समेत चार पर मुकदमा दर्ज कराया था। सूत्रों का कहना है कि यह बात अफसरों तक पहुंची तो जांच पड़ताल शुरू हुई। इसके बाद यह बात सामने आई कि मुकदमा पेशबंदी में लिखाया गया था। जिसके बाद इसे स्पंज कर दिया गया। एसीपी कर्नलगंज राजेश कुमार यादव ने बताया कि आरोप झूठे थे, ऐसे में मुकदमा स्पंज कर दिया गया।
कोर्ट में कार्रवाई के लिए भेजी गई रिपोर्ट
इस मामले में मुकदमा स्पंज करने के साथ ही पुलिस ने शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भी प्रेषित कर दी है। जिसमें बताया गया है कि उसने किसी को नुकसान पहुंचाने की नियत से झूठी शिकायत दर्ज कराई। ऐसे में उसका यह कृत्य भारतीय दंड विधान की धारा 182 के तहत दंडनीय है। गौरतलब है कि इस धारा के अनुसार, जो कोई भी किसी लोकसेवक को ऐसी सूचना, जिसके निराधार होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देगा कि लाेकसेवक विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिससे कि किसी को क्षति या क्षोभ हो, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है या एक हजार रुपये के आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।