Rajju Bhaiya State University : प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य और योग की पढ़ाई अनिवार्य
स्नातक प्रथम वर्ष में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को सहगामी पाठ्यक्रम के रूप में भोजन पोषण एवं स्वच्छता और द्वितीय सेमेस्टर में प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनिवार्य रूप से पढ़ना होगा।
विस्तार
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय और इसके संघटक महाविद्यालयों में सत्र 2022-23 से स्नातक स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम लागू होने जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक सेमेस्टर में छात्रों के लिए सहगामी पाठ्यक्रमों को भी लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों को सहगामी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई अनिवार्य रूप से करनी होगी।
स्नातक प्रथम वर्ष में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को सहगामी पाठ्यक्रम के रूप में भोजन पोषण एवं स्वच्छता और द्वितीय सेमेस्टर में प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनिवार्य रूप से पढ़ना होगा। स्नातक द्वितीय वर्ष में तीसरे सेमेस्टर के लिए मानव मूल्यों एवं पर्यावरण अध्ययन और चौथे सेमेस्टर के लिए शारीरिक शिक्षा एवं योग की पढ़ाई अनिवार्य होगी। वहीं, तृतीय वर्ष में पांचवें सेमेस्टर के लिए विद्यार्थियों को सहगामी पाठ्यक्रम के रूप में विश्लेषणात्मक क्षमता एवं डिजिटल जागरूकता और छठवें सेमेस्टर में संचार कौशल एवं व्यक्तित्व विकास का अध्ययन करना होगा। स्नातक स्तर पर सहगामी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए शैक्षिक संसाधनों की व्यवस्था महाविद्यालय अपने स्तर पर करेंगे।
अधिकतम 15 वोकेशनल कोर्स शुरू कर सकेंगे कॉलेज
नए सत्र से राज्य विवि के संघटक महाविद्यालयों को अपने स्तर से वोकेशनल कोर्स शुरू करने की सहूलियत दी जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 33 वोकेशनल पाठ्यक्रमों की लिस्ट जारी की गई है। महाविद्यालयों को विद्यार्थियों की संख्या एवं संसाधनों की उपलब्धता के मद्देनजर अधिक 15 वोकेशनल प्रशिक्षण क्लस्टर संचालित करने की अनुमति होगी। अगर कोई महाविद्यालय 15 से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करना चाहता है तो उसे कारण सहित संसाधनों की उपलब्धता का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए अलग से क्लस्टर संचालित करने की अनुमति लेने के लिए आवेदन करना होगा।
ये हैं व्यावसायिक/कौशल विकास के पाठ्यक्रम
बेसिक्स ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन, फोटोग्राफी, बेसिक्स ऑफ माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, वीडियोग्राफी, रेशम कीट पालन, खेल पोषण एवं भौतिक चिकित्सा, मधुमक्खी पालन, यात्रा प्रबंधन, कुटीर उद्योग, प्रिंटिंग, पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल विज्ञान, प्रकाशन, हस्तशिल्प, नवीनीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन, आचार एवं पापड़ निर्माण, मृदा एवं जल संरक्षण, डेयरी उत्पाद एवं प्रसंस्करण, सौर्य ऊर्जा, बागवानी, पर्यटन प्रबंधन, बिजली उपकरणों की मरम्मत एवं रखरखाव, आतिथ्य प्रबंधन, योग एवं फिटनेस, खाद्य प्रसंस्करण, फर्नीचर विकास, नर्सरी प्रबंधन, मत्स्य प्रबंधन, पत्रकारिता एवं जन संचार, फैशन डिजाइन, इंटीरियर डिजाइन, हरितगृह तकनीक, कुक्कुट पालन, मूर्तिशिल्प।