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जियो सेल से पुल के किनारे वाले कटान को रोकेगा रेलवे
Tue, 04 Aug 2020 02:51 AM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 02:51 AM IST
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- फोटो : prayagraj
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बारिश के दिनों में नदी में अचानक पानी बढ़ने और उसकी वजह से रेल पुल के किनारे होने वाली कटान को रोकने का रेलवे ने अब एक नया तरीका इजाद किया है । उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने अपने पुल के किनारे मिट्टी कटान से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जियो सेल तकनीक अपनाई है।
यह तकनीक का प्रयोग रेलवे प्रयागराज स्थित नैनी यमुना पुल के अलावा उत्तर मध्य रेलवे जोन के अंतर्गत आने वाले सभी महत्वपूर्ण पुलों के पहले मिट्टी कटाव रोकने के लिए करेगा। बारिश के दिनों में नदी के तेज बहाव से रेलवे पुलों के किनारे मिट्टी में कटान हो जाती है। इस वजह से रेल ट्रैक भी असुरक्षित हो जाता है।
ऐसे में पुल के पास मिट्टी की कटान ना हो इसके लिए रेलवे में प्रयोग के तौर पर जियो सेल तकनीक का इस्तेमाल शुरू कियाहै। इसके तहत ब्रिज के पहले मिट्टी कटान रोकने के लिए मजबूत फाइबर के तीन-तीन इंच के खाचो की बड़ी सी श्रृंखला को जमीन में बिछाया जाता है। इसके बाद इन खाचों में मिट्टी भर दी जाती है। मिट्टी भरने के बाद चाहे तो उसमें घास भी लगाई जा सकती है। रेलवे अफसर बताते हैं कि यह खांचा तकरीबन 50 मीटर तक बिछाना चाहिए।
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अभी इस तकनीक का प्रयोग उत्तर मध्य रेलवे में पहली बार आगरा के स्ट्रैची ब्रिज के पास किया गया है। इस बारे में उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि जिओ सेल तकनीक से हम मिट्टी कटान से होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकते हैं ,और यह तकनीक अच्छी और सस्ती भी है। एनसीआर जोन के सभी महत्वपूर्ण पलों के पहले मिट्टी के कटाव रोकने के लिए इस तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
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यह तकनीक का प्रयोग रेलवे प्रयागराज स्थित नैनी यमुना पुल के अलावा उत्तर मध्य रेलवे जोन के अंतर्गत आने वाले सभी महत्वपूर्ण पुलों के पहले मिट्टी कटाव रोकने के लिए करेगा। बारिश के दिनों में नदी के तेज बहाव से रेलवे पुलों के किनारे मिट्टी में कटान हो जाती है। इस वजह से रेल ट्रैक भी असुरक्षित हो जाता है।
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ऐसे में पुल के पास मिट्टी की कटान ना हो इसके लिए रेलवे में प्रयोग के तौर पर जियो सेल तकनीक का इस्तेमाल शुरू कियाहै। इसके तहत ब्रिज के पहले मिट्टी कटान रोकने के लिए मजबूत फाइबर के तीन-तीन इंच के खाचो की बड़ी सी श्रृंखला को जमीन में बिछाया जाता है। इसके बाद इन खाचों में मिट्टी भर दी जाती है। मिट्टी भरने के बाद चाहे तो उसमें घास भी लगाई जा सकती है। रेलवे अफसर बताते हैं कि यह खांचा तकरीबन 50 मीटर तक बिछाना चाहिए।
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अभी इस तकनीक का प्रयोग उत्तर मध्य रेलवे में पहली बार आगरा के स्ट्रैची ब्रिज के पास किया गया है। इस बारे में उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि जिओ सेल तकनीक से हम मिट्टी कटान से होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकते हैं ,और यह तकनीक अच्छी और सस्ती भी है। एनसीआर जोन के सभी महत्वपूर्ण पलों के पहले मिट्टी के कटाव रोकने के लिए इस तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।