Railway News : रद्द ट्रेनों की वजह से निरस्त हो गए 11 हजार से अधिक टिकट
कोहरे की वजह से प्रयागराज के कई स्टेशनों से होकर गुजरने वाली 22 ट्रेनें तीन माह के लिए निरस्त कर दी गई हैं। ट्रेनों के निरस्तीकरण ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। सहालग, सर्दी की छुट्टियां और उसके बाद माघ मेला के दौरान यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है।
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कोहरे की वजह से संगम नगरी के कई स्टेशनों से होकर गुजरने वालीं 22 ट्रेनों के निरस्त होने से यात्रियों के सफर पर संकट आ गया है। हरिद्वार, ऊंचाहार, बरेली एक्सप्रेस आदि ट्रेनों के तीन माह निरस्त होने की वजह से 11 हजार से ज्यादा आरक्षित टिकट निरस्त हुए हैं। जिन लोगों ने संबंधित ट्रेनों में काफी पहले अपना आरक्षण करवा लिया था, उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सहालग और सर्दी की छुट्टियों की वजह से तमाम ट्रेनों में एक से डेढ़ माह तक कंफर्म बर्थ उपलब्ध नहीं है।
दरअसल, कोहरे की वजह से प्रयागराज के कई स्टेशनों से होकर गुजरने वाली 22 ट्रेनें तीन माह के लिए निरस्त कर दी गई हैं। ट्रेनों के निरस्तीकरण ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। सहालग, सर्दी की छुट्टियां और उसके बाद माघ मेला के दौरान यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है। सबसे ज्यादा दिक्कत चंडीगढ़ जाने वाली ऊंचाहार एक्सप्रेस, योगनगरी ऋषिकेश जाने वाली हरिद्वार एक्सप्रेस और बरेली जाने वाली प्रयाग-बरेली एक्सप्रेस के निरस्तीकरण से हुई है।
हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली जाने वाले यात्री प्रयाग-बरेली एवं हरिद्वार एक्सप्रेस में ही सफर करना पसंद करते हैं। इसी तरह करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, अंबाला, चंडीगढ़ जाने वाले यात्रियों की ऊंचाहार पसंदीदा ट्रेन है। इन तीनों को ही निरस्त करने की वजह से संबंधित स्टेशनों पर जाने वाले यात्रियों के समक्ष विकल्प सीमित रह गए हैं। उक्त स्टेशनों पर जाने वाली अन्य दूसरी ट्रेनों में पहले से ही लंबी प्रतीक्षा सूची है। बताया जा रहा है कि जो 22 ट्रेनें निरस्त हुई हैं उसमें 11 हजार से ज्यादा टिकट निरस्त होंगे।
ऑनलाइन टिकट लेने वालों का रिफंड उनके खाते में स्वत: ही आ जाएगा, लेकिन काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों का रिफंड रिजर्वेशन काउंटर से ही होगा। इस बारे में प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार सिंह का कहना है कि कोहरे की वजह से हर वर्ष कुछ ट्रेनों को निरस्त किया जाता है। पहले के वर्षों के मुकाबले अब निरस्त होने वाली ट्रेनों की संख्या कम की गई है।