रेलवे : 165 वर्ष पूर्व आज ही के दिन प्रयागराज से कानपुर के बीच चली थी भाप इंजन वाली ट्रेन
आमतौर पर कहा जाता है कि देश में पहली बार 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली थी, लेकिन उसके बाद रेलवे का नेटवर्क कितना बढ़ा और कौन सा शहर कब रेलवे से जुड़ा, इसकी कम ही जानकारी मिलती है।
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भारतीय रेलवे के इतिहास में आज की तारीख बेहद अहम है। आज ही के दिन 165 वर्ष पूर्व तीन मार्च 1859 को प्रयागराज से कानपुर के बीच पहली बार ट्रेन चली थी। खास बात यह है कि उस दौरान रेलवे के नेटवर्क में दिल्ली शामिल नहीं हुआ था। प्रयागराज से कानपुर के बीच चली ट्रेन के पांच वर्ष बाद दिल्ली, रेलवे के नेटवर्क में शामिल हो सका था।
आमतौर पर कहा जाता है कि देश में पहली बार 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली थी, लेकिन उसके बाद रेलवे का नेटवर्क कितना बढ़ा और कौन सा शहर कब रेलवे से जुड़ा, इसकी कम ही जानकारी मिलती है।
रेलवे के लिहाज से प्रयागराज आज जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही वह अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भी था। तब अंग्रेजों ने कोलकाता को दिल्ली से जोड़ने के लिए रेलमार्ग बनाने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि उत्तर भारत में पहली बार इलाहाबाद से कानपुर के बीच ही ट्रेन चली थी।
तीन मार्च 1859 में महज दस किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से पहली मालगाड़ी पुराना कानपुर यानी सीएनबी (कानपौर नार्थ बैरक्स ) गई थी। आज स्टेशन का नाम भले ही कानपुर सेंट्रल हो गया हो, लेकिन उसका कोड सीएनबी ही है। तब इलाहाबाद से कानपुर के बीच गई ट्रेन में स्टीम इंजन लगा हुआ था।
तीन मार्च को ही खोली गई थी संगम किनारे किले में जाने वाली लाइन
खास बात यह है कि तीन मार्च को ही प्रयागराज स्थित किले में जाने वाली रेल लाइन भी खोली गई थी। तब कानपुर से प्रयागराज तक बिछाए गए रेल ट्रैक में शुरुआत में केवल सैनिकों और उपकरणों की आवाजाही ही होती थी। हालांकि 1954 में लगे कुंभ के बाद किला लाइन को बंद कर दिया गया था। बीते कई वर्षों पहले परेड स्थित लाइन को पूरी तरह से उखाड़ दिया गया है। अब सिर्फ पुरानी तस्वीरों में ही परेड मैदान से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन देखी जा सकती है।
1855 में लाइन बिछाने का शुरू हुआ था काम
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के तकरीबन दो वर्ष यानी 1855 से ही प्रयागराज-कानपुर रेलखंड पर रेल पटरी बिछाने का काम शुरू हुआ। इस रेलखंड का बड़ा हिस्सा मई 1856 में ही तैयार कर लिया गया था। इतना ही नहीं फरवरी 1857 में तकरीबन 41.8 किमी तक एक इंजन का भी ट्रायल किया गया, लेकिन प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई जगह रेल पटरियां उखाड़ दिए जाने से यह कार्य पिछड़ गया। इसके बाद यह रूट 1859 में पूरी तरह तैयार हो गया और तीन मार्च को पहली बार प्रयागराज से कानपुर के लिए ट्रेन चली। उत्तर मध्य रेलवे की कॉफी टेबल बुक में भी इसका उल्लेख है।
तब यमुना में फेरी से ट्रेन के कोच कराए जाते थे पार
भारतीय रेलवे के नक्शे में राजधानी दिल्ली 1864 में शामिल हुई थी। तब एक अगस्त 1864 में हावड़ा से पहली ट्रेन दिल्ली पहुंची। हालांकि उस दौरान प्रयागराज में यमुना पुल तैयार नहीं था। इसे देखते हुए फेरी से ट्रेन के कोच नदी के पार करवाए जाते रहे। हालांकि 15 अगस्त 1865 में नैनी में यमुना पुल तैयार हो गया था।
निश्चित ही आज का दिन बहुत खास है। 165 वर्ष पूर्व आज ही के दिन प्रयागराज से कानपुर के बीच पहली ट्रेन चली थी। तब से अब तक रेलवे काफी आगे बढ़ चुकी है। - हिमांशु बडोनी, मंडल रेल प्रबंधक, प्रयागराज।