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इलाहाबाद विश्वविद्यालयः कुलपति के निर्णय पर उठे सवाल

Wed, 06 Jun 2018 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 06 Jun 2018 12:50 AM IST
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Questions on the decision of the Vice Chancellor
हाॅस्टल खाली कराने के विरोध में उतरे छात्रों पर लाठीचार्ज करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लगातार दूसरे वर्ष हॉस्टल वॉशआउट का कार्यक्रम निर्धारित किया था लेकिन बवाल के बाद इविवि प्रशासन को बैठफुट पर आना पड़ गया और कुलपति ने अग्रिम आदेशों तक वॉशआउट का निर्णय वापस ले लिया। कुलपति के इस निर्णय पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। कुलपति ने अपने आदेश में जिस समस्या को निर्णय वापस लेने की वजह बताई है, उसका निराकरण तो सोमवार को वॉशआउट का निर्णय लेने के दौरान ही कर लिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कुलपति ने आखिर किसके दबाव में अपना निर्णय वापस लिया।
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कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने वॉशआउट का निर्णय वापस लेते हुए कहा है कि जून में कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं हैं और इसमें बड़ी संख्या में इविवि के छात्र भी शामिल हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें इस वक्त हॉस्टल से बाहर करना ठीक नहीं है, इसलिए अग्रिम आदेशों का हॉस्टल वॉशआउट का निर्णय वापस लिया जाता है। छात्रों की इस समस्या के बारे में इविवि प्रशासन को पहले से मालूम था। यही वजह रही कि सोमवार को जब पुलिस और इविवि प्रशासन की संयुक्त बैठक में वॉशाआउट का निर्णय लिया गया तो यह भी तय हो गया था कि जो छात्र देश के किसी भी आयोग की मुख्य परीक्षा में शमिल हो रहे हैं।
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ऐसे छात्रों के लिए अलग से समर हॉस्टल की व्यवस्था की जाएगी ताकि उनकी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित न हो। छात्रों को केवल परीक्षा से संबंधित अपना प्रवेश पत्र दिखाना था और इसी आधार पर उन्हें हॉस्टल आवंटित किए जाने थे। इसके लिए छात्रों से आवेदन भी मांग लिए गए थे और समर हॉस्टल के नाम भी तय कर लिए गए थे। पिछले साल इलाहाबाद आई यूजीसी टीम की रिपोर्ट में भी हॉस्टलों की बदहाली पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि हॉस्टलों में अवैध कब्जे हैं और इविवि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हॉस्टल में कब्जे न हों। इन सबके बीच बवाल के बाद हॉस्टल वॉशआउट का निर्णय वापस लिए जाने पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं।
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पिछले साल की घटना से भी नहीं लिया सबक
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले साल की घटना से भी कोई सबक नहीं लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन को अगर वॉशआउट का निर्णय वापस लेना ही था तो एक दिन पहले हॉस्टल खाली कराने का फैसला क्यों किया गया, जबकि सभी जानते थे कि इस फैसले के बाद बवाल होना तय है।

पिछले सा 28 अप्रैल को वॉशआउट के विरोध में जमकर बवाल हुआ था। दर्जनों वाहन फूंक दिए गए थे। पुलिस और पीसीएस पर बमबाजी हुई थी। फायरिंग भी हुई थी। पुलिस ने हॉस्टलों में घुसकर छात्रों को पीटा था। तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र समेत कई छात्रों को जेल भेज दिया गया था। इतना बवाल होने के बावजूद इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस और जिला प्रशासन ने एहतियात नहीं बरती।

अगर हॉस्टल वॉश आउट का निर्णय ले लिया गया तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए। यूनियन हॉल के सामने पीएसी के दर्जनों जवान तैनात थे। कई थानों की फोर्स मौजूद थी लेकिन बावजूद छात्रों का वहां इकट्ठा होने दिया गया।

पुलिस को जैसे मालूम था कि कुछ देर में बवाल होने वाला है, सो सुबह आठ बजे से ही विश्वविद्यालय की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। चार सौ से अधिक छात्र पूरे परिसर में घूमते हुए वीसी दफ्तर पहुंचे लेकिन फोर्स ने उन्हीं कहीं भी रोकने की कोशिश नहीं की। पूरी फोर्स विश्वविद्यालय के अलग-अलग गेट पर तैनात थी जबकि हॉस्टलों के गेट पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही थी। अगर अफसरों ने पिछली घटना से सबक लिया होता तो यह बवाल होने से रोका जा सकता था।

कई दूसरे मुद्दे भी बने छात्रों के गुस्से की वजह
हॉस्टल वॉशआउट के साथ कई दूसरे मुद्दे भी छात्रों के गुस्से की वजह बने और मंगलवार को यह गुस्सा बवाल में तब्दील हो गया। रजिस्ट्रार से उनका काम छीने जाने से छात्रों का बड़ा वर्ग कुलपति से नाराज है। इसके अलावा शिक्षक भर्ती की धांधली की लगातार शिकायतों के बावजूद कुलपति की ओर से कोई उचित कार्रवाई न होने से छात्र भड़के हुए हैं।

इविवि छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह काक हना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को जिस तरह से रजिस्ट्रार को बिना कारण बताए पद से हटाया है, वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक हैं। वीसी लगातार अध्यापकों को प्रशासनिक पदों पर बैठा रहे हैं और इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। विश्वविद्यालय में छात्रों का लगातार नुकसान हो रहा है। कई वर्षों बाद इविवि को कर्नल हितेश लव के रूप में स्थायी रजिस्ट्रार मिला था लेकिन इविवि प्रशासन ने बिना किसी वाजिब कारण के उनसे काम वापस ले लिया। ऋचा सिंह ने इविवि में इस मनमानी और अव्यवस्था को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है।

उधर, छात्र नेता आनंद सिंह का कहना है कि शिक्षक भर्ती में लगातार घपले की शिकायत आ रही है। आरक्षण रोस्टर में भी इविवि प्रशासन मनमानी कर रहा है। कुलपति को मामले में कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन सबकुछ उन्हीं की छत्रछाया में चल रहा है। छात्रसंघ महामंत्री निर्भय द्विवेदी छात्र शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। उनकी मांग आरक्षण नियमों के अनुरूप शिक्षक भर्ती और अवैध रूप से की गई नियुक्ति रद्द किए जाने की थी। साथ ही हॉस्टल वॉशउटउ का विरोध हो रहा था। महामंत्री का आरोप है कि  अराजकता कुलपति के करीबियों ने फैलाई ताकि बवाल बढ़ जाए और इसमें छात्रों का आंदोलन दब जाए।


नहीं हो सका रोजगार अधिकार मार्च
रोजगार मांगे इंडिया के बैनर तले छात्रों ने मंगलवार शाम पांच बजे प्रदर्शन करने और रोजगार अधिकार मार्च निकालने का निर्णय लिया था लेकिन इविवि में बवाल के बाद यह आंदोलन टल गया। संगठन से जुड़े एक छात्र नेता को इविवि में हुए बवाल के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। बवाल के कारण शाम को छात्र इकट्ठा नहीं हो सके।
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