फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Puri Shankaracharya said: Bigotry should be answered with bigotry only, the decision of duty is not one-sided

पुरी शंकराचार्य बोले : कट्टरता का जवाब कट्टरता से ही दिया जाना चाहिए, कांटे से ही कांटा निकलता है

Fri, 19 May 2023 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 19 May 2023 05:55 PM IST
सार

कट्टरता का अर्थ यह होता है कि अगर सामने वाला बाध्य कर दे तो कांटे से कांटा निकलता है। कहा कि हम सहिष्णु अवश्य हैं, लेकिन अन्याय को सहना भी उचित नहीं है। नाथ संप्रदाय पर किए गए प्रश्न के जवाब में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि तांत्रिक विद्या से व्यक्ति लौकिक और पारलौकिक उत्कर्ष प्राप्त कर सके, परम तत्व को प्राप्त कर सके, यही नाथ संप्रदाय की उद्भावना का मूल था।

विज्ञापन
Puri Shankaracharya said: Bigotry should be answered with bigotry only, the decision of duty is not one-sided
पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोवर्धनमठ पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म ही पूरे विश्व में शांति का संदेश दे सकता है। कहा कि विश्व में शांति के लिए सनातन धर्म के मर्म को सभी को समझना होगा। पुरी शंकराचार्य ने रूस-यूक्रेन युद्घ को लेकर किए गए सवाल के जवाब में ये बातें कहीं।

विज्ञापन


पुरी शंकराचार्य ने हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच लगातार बढ़ रही कट्टरता के सवाल पर कहा कि कोई भी तंत्र जब किसी दूसरे तंत्र को नीचा दिखाने के लिए कट्टरता का परिचय देता है, तब सामने वाले को भी ऐसा ही परिचय देना पड़ता है। कट्टरता का जवाब कट्टरता से ही दिया जाना चाहिए। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आगे कहा कि गीता में व्यावहारिक धरातल पर यह तथ्य स्थापित किया गया कि विवेकी का दायित्व अधिक होता है।
विज्ञापन


गीता में अर्जुन का यही पक्ष था। कहा कि धृतराष्ट्र के पुत्रों ने युद्घ शुरू किया। इससे विवेक रखने वालों को इस युद्घ से परे होना चाहिए, क्योंकि उसका दायित्व अधिक होता है। अर्जुन का यही पक्ष है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि माना कि विवेकी का दायित्व अधिक होता है। पर पांच पांडवों के लिए केवल पांच गांव मांगने पर भी दुर्योधन देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

कट्टरता का अर्थ यह होता है कि अगर सामने वाला बाध्य कर दे तो कांटे से कांटा निकलता है। कहा कि हम सहिष्णु अवश्य हैं, लेकिन अन्याय को सहना भी उचित नहीं है। नाथ संप्रदाय पर किए गए प्रश्न के जवाब में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि तांत्रिक विद्या से व्यक्ति लौकिक और पारलौकिक उत्कर्ष प्राप्त कर सके, परम तत्व को प्राप्त कर सके, यही नाथ संप्रदाय की उद्भावना का मूल था।

विश्व में शांति कैसे स्थापित हो, इस प्रश्न के उत्तर में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि जैसा में दूसरे से व्यवहार चाहते हैं, वैसा ही हम उसके साथ भी करें, शांति का यही स्वरूप है। तभी मानवाधिकार की सीमा में रहकर हम एक-दूसरे के पोषक हो सकते हैं।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्घ को लेकर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि मैने बहुत पहले ही संकेत किया था कि रूस उपद्रव मचाएगा। कहा कि सामने वाला चाहे या फिर न चाहे अपने अस्तित्व की रक्षा करने के लिए वह युद्घ के लिए विवश हो जाता है। यूक्रेन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। रूस और यूक्रेन की वर्चस्व की जंग में मानवता के साथ प्रकृति भी तबाह हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युुद्ध रुकवाने के लिए मध्यस्थता का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed