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माध्यमिक शिक्षा में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई का प्रस्ताव
Mon, 06 May 2019 12:43 AM IST
विनोद सिंह
Prayagraj
Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 06 May 2019 12:43 AM IST
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पहुंचे नेता।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी दर्शनशास्त्र को विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। इस आशय का प्रस्ताव रविवार को दर्शन परिषद के 34वें अधिवेशन में जनरल बॉडी की मीटिंग में पारित किया गया। इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में दर्शन परिषद के 34वें अधिवेशन की शुरुआत हुई।
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दो दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन प्रस्ताव पारित करने के साथ ही निर्णय लिया गया कि जल्द ही परिषद की ओर से सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी कि माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में दर्शनशास्त्र को भी विषय के रूप में शामिल किया जाए। इससे पूर्व परिषद के सचिव प्रो. एचएस उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। परिषद के अध्यक्ष प्रो. सभाजीत मिश्र ने परिषद के इतिहास एवं मूल लक्ष्य पर प्रकाश डाला। जबलपुर विश्वविद्यालय के प्रो. गायत्री सिन्हा ने उपनिषद एवं सुकरात के जीवन से संबंधित उदाहरणों के माध्यम से सिद्धा किया कि विज्ञान एवं अध्यात्म एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि पूरक हैं। कहा, विज्ञान एवं अध्यात्म का मुख्य लक्ष्य मानव रचना होना चाहिए। जेएनयू के प्रो. हरीराम मिश्र ने कहा कि अध्यात्म भी एक विज्ञान है और इसके ‘वैज्ञानिक ऋषियों’ का मूल उद्देश्य विश्व शांति की स्थापना करना है। कला संकाय के डीन प्रो. केएस मिश्र ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। ईसीसी के डॉ. संजय शुक्ला एवं डॉ. शिवभानु सिंह ने भी अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिए।
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