{"_id":"5dbc87d28ebc3e016968a130","slug":"prof-alok-dubey-memorial-lecter-at-allahabad-university-allahabad-news-ald259021880","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूगोल के क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूगोल के क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
विज्ञापन
Prof. Alok Dubey memorial Lecter at Allahabad University
- फोटो : CITY DESK
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रो. आलोक दुबे मेमोरियल लेक्चर में बोले डॉ. पृथ्वीश
एमए की टॉपर स्वाति सिंह को दिया गया गोल्ड मेडल
प्रयागराज, 1 नवंबर। आने वाले दिनों में भूगोल के क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढे़ंगे। यह बात पूर्व सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने शुक्रवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित प्रो. आलोक दूबे मेमोरियल लेक्चर सीरीज-2019 के तहत आयोजित व्याख्यान में कही।
उन्होंने तर्क सहित इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण एक भूगोलविद् ही उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जीआईएस तकनीक के उपयोग से कर सकता है। सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमए भूगोल की टॉपर स्वाति सिंह विसन को पांच हजार रुपये का चेक, स्मृति चिह्न और पहला प्रो. आलोक दुबे स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने प्रो. दुबे के भूगोल में योगदान की सराहना की और उनके असमय जाने पर शोक व्यक्त किया।
भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस ओझा ने बताया कि प्रो. दुबे का रिमोट सेंसिंग और जीआईएस में अद्वितीय योगदान रहा। अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. ममता दुबे ने मांग की कि प्रो. आलोक दुबे की ओर से भूगोल विभाग में स्थापित रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस की लैब पुन: शुरू की जाए। प्रो. दुबे ने वर्ष 2002 से 2015 तक पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस के कोर्स को संचालित किया था। कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग के प्रो. एआर सिद्दीकी ने किया।
विज्ञापन
वीडियो देख भर आईं आंखें
कार्यक्रम के दौरान प्रो. आलोक दुबे के शोध कार्यों एवं शिक्षा पर आधारित 15 मिनट का एक मर्मस्पर्शी वीडियो भी दिखाया गया। वीडियो देख वहां मौजूद दर्शकों की आंखें भर आईं। यह वीडियो डॉ. ममता दुबे एवं उनकी विधि की छात्रा शिवांगी ने बनाया है।
विज्ञापन
एमए की टॉपर स्वाति सिंह को दिया गया गोल्ड मेडल
प्रयागराज, 1 नवंबर। आने वाले दिनों में भूगोल के क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढे़ंगे। यह बात पूर्व सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने शुक्रवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित प्रो. आलोक दूबे मेमोरियल लेक्चर सीरीज-2019 के तहत आयोजित व्याख्यान में कही।
उन्होंने तर्क सहित इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण एक भूगोलविद् ही उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जीआईएस तकनीक के उपयोग से कर सकता है। सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमए भूगोल की टॉपर स्वाति सिंह विसन को पांच हजार रुपये का चेक, स्मृति चिह्न और पहला प्रो. आलोक दुबे स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने प्रो. दुबे के भूगोल में योगदान की सराहना की और उनके असमय जाने पर शोक व्यक्त किया।
विज्ञापन
भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस ओझा ने बताया कि प्रो. दुबे का रिमोट सेंसिंग और जीआईएस में अद्वितीय योगदान रहा। अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. ममता दुबे ने मांग की कि प्रो. आलोक दुबे की ओर से भूगोल विभाग में स्थापित रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस की लैब पुन: शुरू की जाए। प्रो. दुबे ने वर्ष 2002 से 2015 तक पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस के कोर्स को संचालित किया था। कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग के प्रो. एआर सिद्दीकी ने किया।
विज्ञापन
वीडियो देख भर आईं आंखें
कार्यक्रम के दौरान प्रो. आलोक दुबे के शोध कार्यों एवं शिक्षा पर आधारित 15 मिनट का एक मर्मस्पर्शी वीडियो भी दिखाया गया। वीडियो देख वहां मौजूद दर्शकों की आंखें भर आईं। यह वीडियो डॉ. ममता दुबे एवं उनकी विधि की छात्रा शिवांगी ने बनाया है।

Prof. Alok Dubey memorial Lecter at Allahabad University- फोटो : CITY DESK