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आईविटनेस और मेडिकल साक्ष्य में विरोधाभास होने पर मेडिकल रिपोर्ट को वरीयता: हाईकोर्ट

Tue, 09 Jun 2020 01:02 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 09 Jun 2020 01:02 AM IST
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Priority to medical report over contradiction in eyewitness and medical evidence: High court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी आपराधिक घटना में चश्मदीद गवाह के बयान में यदि विरोधाभास हो और मेडिकल रिपोर्ट उसके बयान को सत्यापित नहीं कर रही हो।

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मेडिकल रिपोर्ट से आंखों देखी घटना का होना असंभव प्रतीत होता हो वहां मेडिकल रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण साक्ष्य होगी और उसके आधार पर साक्ष्य के मूल्यांकन को वरीयता दी जानी चाहिए।
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कोर्ट ने कहा कि आईविटनेस द्वारा दिए गए साक्ष्य की तीन स्थितियां होती हैं पहली पूर्ण विश्वसनीय, दूसरी पूर्ण अविश्वसनीय और तीसरी न तो पूर्ण विश्वसनीय और न ही पूर्ण अविश्वसनीय। इस तीसरी स्थिति अदालत को साक्ष्यों का मूल्यांकन मौखिक बयान के साथ ही अन्य सुसंगत साक्ष्यों के साथ करना चाहिए। 

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Priority to medical report over contradiction in eyewitness and medical evidence: High court
न्यायालय - फोटो : file photo

हत्या के एक मामले में आपराधिक अपील का निस्तारण करते हुए न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने कहा कि स्थापित कानून है कि जब मौखिक साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट असंगत हो तो मौखिक साक्ष्य को वरीयता दी जाएगी। मगर जहां चश्मदीद गवाह के बयान में विरोधाभास हो और मेडिकल साक्ष्य आईविटनेस के साक्ष्य के सही होने की संभावना को पूरी तरह से नकार दे तो मेडिकल साक्ष्य को वरीयता दी जाएगी। अपील पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बहस की। 

Priority to medical report over contradiction in eyewitness and medical evidence: High court
court - फोटो : prayagraj
घटना मुजफ्फनगर के कंधाला थाने की 12 अगस्त 1992 की है। वादी जयवीर सिंह ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भाई रमेश घटना वाले दिन सुबह आठ बजे खेत जा रहा था। गांव के जयसिंह के खेत के पास चक रोड पर शेर सिंह, उसके भाई सहेंद्र, गुलाब और साधू ने मिलकर उसकी गोली मार कर हत्या कर दी। वादी मुकदमा ने खुद को घटना का चश्मदीद गवाह बताते हुए कहा कि उसका भाई सुबह आठ बजे घर से नाश्ता करके निकला था और खेत में पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। 

वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी दलील में कहा कि मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसकी आंत पूरी तरह से खाली थी। इसका अर्थ है कि घटना रात में किसी वक्त या भोर में हुई है।

वादी घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और न ही उसने अभियुक्तों को हत्या करते हुए देखा है। कोर्ट ने पाया कि वादी मुकदमा द्वारा दिए गए बयान तथा अन्य साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट में काफी विरोधाभास है। वादी द्वारा बताई गई घटना अन्य साक्ष्यों से सही साबित नहीं हो रही है। अधीनस्थ न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
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