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लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करना ट्रायल कोर्ट का अधिकार : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 01:52 AM IST
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Prioritizing pending cases is the trial court's prerogative: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करना संबंधित ट्रायल कोर्ट का अधिकार है। न्यायालयों को सामान्य परिस्थितियों में अधीनस्थ अदालतों को किसी मुकदमे के समयबद्ध निस्तारण का निर्देश देने से बचना चाहिए।
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इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के एक दीवानी मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश देने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने राम प्रसाद एवं आठ अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने कानपुर नगर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित सिविल वाद के शीघ्र निस्तारण के लिए समयबद्ध आदेश जारी करने की मांग की थी।
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कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) के निर्णय में स्पष्ट किया है कि न्यायालयों को सामान्यतः अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं करनी चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे निर्देश दिए जा सकते हैं। मामलों के निस्तारण की प्राथमिकता तय करने का अधिकार संबंधित अदालत के विवेक पर छोड़ना ही न्यायसंगत है।
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हालांकि, कोर्ट ने याचियों को संबंधित ट्रायल कोर्ट में शीघ्र निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र देने की छूट दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित न्यायालय अपने यहां लंबित मामलों की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उस आवेदन पर विधि के अनुसार निर्णय ले।
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