प्राइमरी स्कूल का भवन ढहा, बाल-बाल बचे बच्चे, मची अफरा-तफरी
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थाना क्षेत्र के सोनौटी गांव स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल पहले एक कक्षीय था। बाद में इसे तीन कक्षीय बनाया गया। तकरीबन दस पहले बच्चों के अध्ययन के लिए बनाया गया भवन इन दिनों पूरी तरह जर्जर हो चुका था। कई दिनों से हो रही बारिश के कारण भवन गिरने की कगार पर पहुंच गया था। इसी के चलते यहां तैनात प्रधानाध्यापिका और दो अन्य शिक्षिकाएं बच्चों को अन्य दो भवनों में पढ़ा रही थीं। रोज की तरह शनिवार को भी बच्चे स्कूल आए थे। प्रधानाध्यापिका नूरजहां समेत अन्य दोनों शिक्षिकाएं लंच के वक्त स्कूल परिसर में मौजूद थी। इसी बीच तकरीबन सवा ग्यारह बजे अचानक स्कूल का जर्जर भवन धड़धड़ाकर ढह गया। इससे वहां मौजूद शिक्षिकाओं और बच्चों में अफरा-तफरी मच गई।
सभी वहां से जान बचाकर भागे। हालांकि हादसे में कोई जख्मी नहीं हुआ। भवन गिरने की सूचना पर बच्चों के अभिभावक भी स्कूल पहुंचे तथा उन्हें घर लिवा गए। मामले की जानकारी प्रधानाध्यापिका ने तकाल बेसिक शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को दी। आज रविवार होने के कारण कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। रविवार को जिला पंचायत सदस्य के पुत्र तथा सपा नेता रामप्रताप यादव ने भी अफसरों से बातचीत कर पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
महज दस साल पहले बने स्कूल के भवन के अचानक ढहने से ग्रामीण भी सकते में हैं। शायद यही वजह है कि पूरे मामले की जांच के स्वर तेज होने लगे हैं। जिला पंचायत सदस्य के पुत्र तथा सपा नेता रामप्रताप यादव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से साफ कहा है कि भवन निर्माण में जबरदस्त धांधली की गई है। भवन निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर बेहद ही घटिया सामग्रियों का उपयोग किया गया है। इसे संयोग कहें या फिर शिक्षिकाओं की सूझबूझ कि हादसे की आशंका उन्होंने पहले ही भांप ली थी। इसी के चलते बच्चों को दो दिन पहले से ही जर्जर भवन में बैठाना बंद कर दिया गया था।