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आसमान छूने को तैयार जमीन के भाव

Wed, 03 Aug 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 03 Aug 2016 02:17 AM IST
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Prepare land prices skyrocketed
रीयल स्टेट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अगर आप जमीन या मकान खरीदने की तैयारी में हैं तो यह काम फटाफट कर लें। दो-तीन हफ्ते का आलस आपको लंबी चपत लगा सकता है। जमीन के भाव आसमान छूने को तैयार हैं। 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन नया सर्किल रेट लागू किया जा सकता है। इसके लिए जिला प्रशासन ने सर्वे शुरू करा दिया है। प्रस्तावित रेट लिस्ट आते ही उस पर आपत्तियां एवं दावे लिए जाएंगे और उसके बाद नया सर्किल रेट लागू कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि जमीन की सरकारी कीमत में 20 से 25 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है।
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वैसे तो सर्किल रेट लागू होने का निर्धारित समय एक अगस्त है लेकिन इस बार विलंब हो गया। यह शहरियों के लिए अच्छा मौका है। जमीन महंगी हो, इससे पहले रजिस्ट्री करा लें। नए सर्किल रेट में वृद्धि तय है लेकिन कितनी, इस पर अभी सहमति नहीं बनी है। इसके लिए शहर और ग्रामीण इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया गया है और उप निबंधकों से वृद्धि संबंधी प्रस्ताव मांगे गए हैं। पिछले साल सर्किल रेट में औसतन 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार वृद्धि और ज्यादा होगी।
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संगम नगरी को स्मार्ट सिटी घोषित किया जाना भी इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालांकि पिछले साल भी सर्किल रेट में 25 फीसदी तक का प्रस्ताव था लेकिन जिला अधिवक्ता संघ ने इसका विरोध कर दिया और प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। जनहित में हुए वकीलों के आंदोलन के कारण ही सर्किल रेट में बढ़ोतरी को 15 फीसदी तक सीमित कर दिया गया। इस बारे में एआईजी स्टाम्प पीके सिंह का कहना है कि सर्किल रेट में वृद्धि से संबंधित अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन नया सर्किल रेट लागू किया जा सकता है।
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वकीलों की हड़ताल के कारण जुलाई के महीने में निबंधन विभाग को खासा नुकसान उठाना पड़ा। जुलाई में स्टाम्प से 52 करोड़ 65 लाख रुपये आय का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन हड़ताल के कारण रजिस्ट्री का काम काफी पिछड़ गया और लक्ष्य के मुकाबले महज 50 फीसदी राजस्व की प्राप्ति हुई। इसी तरह जून में लक्ष्य के मुकाबले 80 फीसदी आय हुई। रजिस्ट्री के मामले में लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए इसकी भरपाई के लिए सर्किल रेट में बढ़ोतरी ज्यादा हो सकती है, जो 25 फीसदी तक पहुंच सकती है।


शासन ने शहर से सटे इलाकों में स्थित गांवों को शहरी सीमा में शामिल करने के लिए नगर निगम से प्रस्ताव मांगा है। तकरीबन 140 गांव हैं, जिन्हें शहरी सीमा में शामिल किया जा सकता है। इन गांवों पर भी प्रशासन की नजर है। वैसे जब भी ये गांव शहरी सीमा में शामिल होंगे, वहां रजिस्ट्री कराने पर दो फीसदी विकास शुल्क देना होगा लेकिन यह नियम गांवों को शहरी सीमा में शामिल करने के बाद लागू होगा। फिलहाल इन गांवों में इस साल सर्किट रेट अधिक बढ़ सकता है, क्योंकि इन्हें शहरी सीमा में शामिल किए जाने के प्रस्ताव से ही इन गांवों में जमीन की डिमांड और उसकी कीमत दोनों बढ़ जाएगी।
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