प्रयागराज: माघ मेले में स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट के बाद त्रिवेणी अस्पताल में इलाज ठप
माघ मेले में ड्यूटी पर जा रहे हैं स्वास्थ विभाग के कर्मचारियों के साथ एसडीएम के अर्दली और अन्य कर्मचारियों के द्वारा मारपीट के बाद त्रिवेणी अस्पताल संगम के कर्मचारियों ने इलाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दिया।
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मकर संक्रांति पर माघ मेले में स्वास्थ्यकर्मियों की पिटाई पर जमकर हंगामा हुआ। एंबुलेंस ड्राइवर के दांत टूट गए, जबकि फार्मासिस्ट के कपड़े फट गए। आरोप है कि एसडीएम की मौजूदगी में उनके अर्दली ने मारपीट की। आक्रोशित स्वास्थ्यकर्मियों ने काम ठप करते हुए मेला अस्पताल का गेट बंद कर दिया। इस दौरान मरीजों की फजीहत हुई।
घटना दोपहर 12 बजे के करीब हुई। त्रिवेणी अस्पताल में तैनात तीन डॉक्टर व दो फार्मासिस्ट ड्यूटी के लिए वीवीआईपी घाट पर जा रहे थे। वह आरती घाट के सामने पहुंचे थे कि वहां तैनात एक एसडीएम ने गाड़ी रोक ली। फार्मासिस्ट धमेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने बताया कि वह और उनके साथी ड्यूटी पर जा रहे हैं, इसके बावजूद उनकी गाड़ी नहीं जाने दी गई।
आरोप है कि उन्होंने एसडीएम से बात करनी चाही तो उनके अर्दली ने गालीगलौज शुरू कर दी। विरोध पर ड्राइवर राजेंद्र कुमार को डंडों से पीटना शुरू कर दिया। मारपीट करते हुए उसका भी एप्रन फाड़ दिया। गाड़ी में बैठे डॉक्टरों से भी अभद्रता की। इस दौरान कई पुलिसकर्मी भी आ गए।
पिटाई में ड्राइवर के दांत टूट गए। जानकारी होने पर साथी कर्मचारी भड़क गए और काम ठप कर बाहर चले आए। इसके बाद मेला क्षेत्र में स्थित अन्य अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं ठप कर दी गईं।
आक्रोशित स्वास्थ्यकर्मी मेला क्षेत्र में ही स्थित कार्यालय में पहुंचे और सीएमओ से शिकायत की। सीएमओ के आश्वासन के बाद भी वह काम शुरू करने पर राजी नहीं हुए। इसके बाद मेलाधिकारी व अन्य अफसर दोपहर तीन बजे के करीब पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत की और कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार हुए।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके सिंह ने दावा किया कि मेलाधिकारी के आश्वासन के बाद स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल कर दी गईं। उधर, मेलाधिकारी अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि एसडीएम आशुतोष राय को सेक्टर की जिम्मेदारी से हटाकर कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सुविधाएं ठप होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों को अस्पताल के बाहर से ही लौटा दिया गया। कुछ मरीज ऐसे भी रहे जिन्हें एंबुलेंस से लाया गया था, लेकिन घटना की जानकारी के बाद ही एंबुलेंस से उतारकर चालक व अन्यकर्मी भी प्रदर्शन में शामिल हो गए।