Prayagraj Police : बमबाज कर रहे धमाके, नहीं टूट रही पुलिस की नींद
बमबाजों ने जनपद में पुलिस की नाक में दम कर रखा है। एक के बाद एक लगातार धमाके कर वह सनसनी फैला रहे हैं। फिलहाल पुलिस यह नहीं पता लगा पा रही है कि बम बनाने के लिए इन्हें बारूद कहां से मिल रहा है।
विस्तार
केस एक- 19 मार्च को कटरा में किराना व्यापारी अशोक साहू के घर पर रात दो बजे बाइक से आए तीन बदमाशों ने बमबाजी की। आधी रात जोरदार धमाकों से मोहल्ले में सनसनी फैल गई।
केस दो- नौ अप्रैल को सरायइनायत में भाजपा नेता विजय बिंद के घर पर बम से हमला किया गया। इसमें कार का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया।
केस तीन- 10 अप्रैल को पूरामुफ्ती के पोंगहट पुल मोहल्ले में कबाड़ की दुकान पर बम से हमला किया गया। मात्र 20 रुपये के विवाद में कबाड़ बीनने वाले युवक ने घटना अंजाम दी।
केस चार- 13 अप्रैल को शंकरगढ़ के नारीबारी में ट्रैक्टर एजेंसी संचालक शुभम केसरवानी की कार पर दो बदमाशों ने बम से हमला किया। इसमें व्यापारी समेत दो लोग जख्मी हो गए।केस पांच- 16 अप्रैल को सीएमपी डिग्री कॉलेज के गेट पर सुबह 10 बजे बम फोड़कर दहशत फैलाने का प्रयास किया गया। मामले में एक छात्र व एक छात्रा चोटिल हुए।
बमबाजों ने जनपद में पुलिस की नाक में दम कर रखा है। एक के बाद एक लगातार धमाके कर वह सनसनी फैला रहे हैं। फिलहाल पुलिस यह नहीं पता लगा पा रही है कि बम बनाने के लिए इन्हें बारूद कहां से मिल रहा है। उधर चर्चा यह भी है कि बारूद की बिक्री को लेकर बनाए गए नियम-कानून का पालन प्रभावी ढंग से न होना बमबाजी की लगातार बढ़ती वारदातों का कारण है।
पिछले एक महीने में जिले में शहर से लेकर देहात तक बमबाजी की पांच वारदातें हुईं। इनमें से दो घटनाओं का ही खुलासा हो सका। पिछले साल भी बमबाजी की घटनाएं सामने आईं। हॉलैंड हॉल व एक अन्य हॉस्टल के छात्रों के विवाद में भी रात में कई घंटे तक बमबाजी की गई। बाद में एक हॉस्टल के छत पर रखी पानी की टंकी से भारी मात्रा में बम भी बरामद किए गए। 2023 में उमेश पाल व उनके दो गनर की हत्या के दौरान भी ताबड़तोड़ बम चलाए गए थे।
जानकारों का कहना है कि बदमाशों को गिरफ्तार कर घटनाओं का खुलासा तो कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें बारूद कहां से मिलता ये जानकारी आज तक नहीं जुटाई जा सकी। वहीं, पूर्व में भी बारूद की बिक्री के लिए बनाए गए नियम-कानूनों के सख्ती से पालन के लिए डीजीपी मुख्यालय की ओर से आदेश जारी किए गए। हालांकि इनके पालन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
यह है नियम
विस्फोटक पदार्थों के संबंध में विस्फोटक अधिनियम 1884 मुख्यतः लाइसेंसधारकों के अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर लागू होता है। धारा-5 के तहत विस्फोटक सामग्री के लाइसेंसधारकों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर एक हजार जुर्माने से लेकर तीन वर्ष तक सजा का प्रावधान है। जिलाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों को उन सभी स्थानों का निरीक्षण एवं तलाशी लेने का अधिकार है जहां इसे बेचा या बनाया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें जब्त करने का भी अधिकार है।
क्या हैं निर्देश
(1) विस्फोटक पदार्थ के लाइसेंसधारकों की थानावार सूची अद्यतन व जिलाधिकारी के कार्यालय से सत्यापित हाेनी चाहिए।
(2) पूर्व में विस्फोटक पदार्थों के अवैध प्रयोग में प्रकाश में आए अभियुक्तों की सूची बने और उनकी गतिविधियों की निगरानी हो।
(3) विस्फोटक पदार्थ बरामद होने या प्रयोग करते पकड़े जाने वालों से क्षेत्राधिकारी स्तर पर पूछताछ की जाए। विस्फोटक पदार्थ प्राप्त करने का वास्तविक स्रोत क्या है, इसका पता लगाकर आपूर्ति करने वालों पर भी कार्रवाई की जाए।
(4) विस्फोटक पदार्थ प्राप्त करने वाले स्रोत खदान व पर्वतीय क्षेत्र में सड़क बनाने के स्थान हैं। चट्टानों को उड़ाने में विस्फोटक सामग्री का प्रयोग किया जाता है। जहां ऐसा कार्य चल रहा हो, वहां के क्षेत्राधिकारी द्वारा चेकिंग अवश्य की जानी चाहिए।
(6) लाइसेंसी विक्रेताओं या आपूर्तिकर्ताओं द्वारा विस्फोटक सामग्री के परिवहन संबंधी प्रणाली की समीक्षा की जाए। सुनिश्चित करें कि विस्फोटक अधिनियम के तहत निहित मापदंड के अनुसार परिवहन व्यवस्था की गई है या नहीं।
(7) विस्फोटक पदार्थों के अवैध प्रयोग में निरंतर वृद्धि को देखते हुए नियमित रूप से जनपद के सभी लाइसेंसदारों की आकस्मिक चेकिंग अवश्य की जाए और अगर कोई व्यक्ति लाइसेंस की शर्तों के विपरीत कार्य कर रहा हो, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बारूद बेचने वालाें पर कसेगा शिकंजा, अभियान चलाकर जल्द ही बारूद की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों का पालन कठोरता से कराया जाएगा। लाइसेंस प्राप्त बारूद विक्रेताओं से एक-एक खरीदार की जानकारी ली जाएगी। लाइसेंस की शर्ताें का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। - अभिषेक भारती, डीसीपी नगर