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कोरोना के नोडल इंचार्ज रहे एसीएमओ डॉ.गणेश प्रसाद का निधन, दूसरे की जान बचाते-बचाते खुद गवां बैठे जान
Sat, 25 Jul 2020 09:56 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 25 Jul 2020 09:56 PM IST
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prayagraj news: एसीएमओ प्रयागराज डॉ. गणेश प्रसाद (फाइल फोटो)।
- फोटो : prayagraj
जिले के नोडल प्रभारी कोरोना रहे एडिशनल सीएमओ डॉ. गणेश प्रसाद नहीं रहे। शनिवार को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे पहले वह परिवार के साथ सदस्यों के साथ कोरोना संक्रमित हुए थे। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें एसआरएन के मेडिसिन आईसीयू में भर्ती किया गया था। जहां से उनकी सहमति पर उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया था।
उनकी मौत की खबर परिवारी जनों पर किसी वज्रपात से कम नहीं थे। पत्नी और बच्चों का रोना देखने वालों का कलेजा फट रहा था। वहीं सूचना पर सीएमओ समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य अफसरों ने पहले अस्पताल फिर उनके घर जाकर शोकाकुल लोगों को ढांढ़स बंधाया। रविवार को रसूलाबाद घाट पर उनकी अत्येंष्टि होगी। शव यात्रा सुबह नौ बजे आवास से शुरू होगी।
डॉ. गणेश प्रतापगढ़ में रानीगंज तहसील के कोपा राजगढ़ निवासी थे। यहां शिवकुटी में वह सपरिवार रहते थे। वर्ष 1992 में तैनाती के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनसे मिलने वाला उनके मिलनसार स्वभाव का कायल हो जाता था। जनवरी में उन्हें कोरोना को नोडल प्रभारी बनाया गया। वह इस पद पर करीब चार महीने रहे।
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नोडल प्रभारी पद से हटने के बाद एडिशनल सीएमओ डॉ. गणेश की ड्यूटी रेलवे स्टेशन पर प्रवासियों की थर्मल स्क्रीनिंग करने में लगाई गई। फिर वह रैपिड रिस्पांस टीम का हिस्सा बने। जून में बड़े भाई की मस्तिष्क घात से मृ्त्यु हुई तो वह लखनऊ फिर अपने कोपा राजगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास गए। वहां से लौटे तो बीमार हो गए। 17 जून को बुखार, खांसी की शिकायत परर उन्होंने कोविड जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्हें एसआरएन अस्पताल में भर्ती किया गया। दो पुत्र-दो पुत्रियां, पत्नी और एक रिश्तेदार भी जांच के बाद कोरोना संक्रमित निकले। सभी का इलाज एसआरएन में ही किया गया।
डॉ. गणेश के निधन की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बच्चे, पत्नी रोने लगे। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी सहयोगियों के साथ वहां पहुंचे। उनके आवास पर पार्षद कमलेश तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग शोक संवेदना जताने पहुंचे।
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उनकी मौत की खबर परिवारी जनों पर किसी वज्रपात से कम नहीं थे। पत्नी और बच्चों का रोना देखने वालों का कलेजा फट रहा था। वहीं सूचना पर सीएमओ समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य अफसरों ने पहले अस्पताल फिर उनके घर जाकर शोकाकुल लोगों को ढांढ़स बंधाया। रविवार को रसूलाबाद घाट पर उनकी अत्येंष्टि होगी। शव यात्रा सुबह नौ बजे आवास से शुरू होगी।
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डॉ. गणेश प्रतापगढ़ में रानीगंज तहसील के कोपा राजगढ़ निवासी थे। यहां शिवकुटी में वह सपरिवार रहते थे। वर्ष 1992 में तैनाती के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनसे मिलने वाला उनके मिलनसार स्वभाव का कायल हो जाता था। जनवरी में उन्हें कोरोना को नोडल प्रभारी बनाया गया। वह इस पद पर करीब चार महीने रहे।
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नोडल प्रभारी पद से हटने के बाद एडिशनल सीएमओ डॉ. गणेश की ड्यूटी रेलवे स्टेशन पर प्रवासियों की थर्मल स्क्रीनिंग करने में लगाई गई। फिर वह रैपिड रिस्पांस टीम का हिस्सा बने। जून में बड़े भाई की मस्तिष्क घात से मृ्त्यु हुई तो वह लखनऊ फिर अपने कोपा राजगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास गए। वहां से लौटे तो बीमार हो गए। 17 जून को बुखार, खांसी की शिकायत परर उन्होंने कोविड जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्हें एसआरएन अस्पताल में भर्ती किया गया। दो पुत्र-दो पुत्रियां, पत्नी और एक रिश्तेदार भी जांच के बाद कोरोना संक्रमित निकले। सभी का इलाज एसआरएन में ही किया गया।
कोविड वार्ड से मेडिसिन आईसीयू हुए थे शिफ्ट
सांस लेने में दिक्कत के कारण एडिशनल सीएमओ डॉ. गणेश कुमार को एसआरएन के कोविड वार्ड से 27 जून को मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट किया गया। यहां हाई नजल ऑक्सीजन पर उन्हें रखा गया। इलाज के दौरान उनकी तबीयत कुछ संभली तो उन्होंने अपने बैचमेट डॉक्टर के लखनऊ रोड स्थित नर्सिंग होम में खुद का इलाज कराने की सहमति दी। एसआरएन से पांच जुलाई को डॉ. गणेश नर्सिंग होम शिफ्ट हो गए। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें निमोनिया के साथ फेफड़े का संक्रमण था। शनिवार को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।डॉ. गणेश के निधन की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बच्चे, पत्नी रोने लगे। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी सहयोगियों के साथ वहां पहुंचे। उनके आवास पर पार्षद कमलेश तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग शोक संवेदना जताने पहुंचे।