आगरा, मेरठ, कानपुर के मुकाबले डेथे रेट भी है कम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Sat, 27 Jun 2020 11:15 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

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जिले में लगातार बढ़ रही कोरोना मरीजों की संख्या की चिंता के बीच राहत की बात यह भी है कि रिकवरी रेट 72 फीसदी से अधिक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की राजधानी से करीब 12 फीसदी अधिक है। जबकि, डेथ रेट का आंकड़ा दो गुना अधिक है। प्रयागराज में डेथ रेट साढ़े तीन फीसदी के आसपास है जबकि राजधानी लखनउ में मात्र पौने दो फीसदी ही डेथ रेट है।
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जबकि गाजियाबाद, मेरठ और आगरा के मुकाबले न केवल रिकवरी रेट अधिक है बल्कि डेथ रेट भी कम है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में डेथ रेट करीब चार फीसदी, मेरठ में सवा आठ फीसदी से अधिक है और आगरा में साढ़े सात फीसदी के आसपास है।
यह आंकड़ा प्रदेश के नौ टॉप जिलों जहां कोरोना के मामलों की संख्या अधिक है, की 27 जून तक की रिपोर्ट पर आधारित है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस समय कोरोना मरीजों की संख्या इस समय 270 पहुंच गई है। इसमें से 185 लोग ठीक होकर जा चुके हैं।
जबकि 66 के करीब एडमिट हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान 13 लोगों को छु्ट्टी मिली है। इससे ठीक होने वालों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालांकि, मरीजों की ज्यादा संख्या के टॉन नौ जिलों में सबसे बेहतर रिकार्ड आगरा का है। आगरा का रिकवरी रेट 83 फीसदी के करीब है।

जबकि मेरठ का 61 फीसदी, गौतम बुद्धनगर में 54 फीसदी, कानपुर का 66 फीसदी, गाजियाबाद में 45 फीसदी है। जबकि प्रदेश की राजधानी लखनउ में यह आंकड़ा 60 फीसदी के पास है। प्रयागराज में आठ दिनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ते  हैं। इन आठ दिनों में  102 नए मामले सामने आए हैं। 18 जून तक 141 मरीज कोरोना पॉजिटिव थे। 
 
हफ्ते भर में ठीक होकर घर जाने वालों का आंकड़ा 
तारीख           संख्या
27                  13
26                   9
25                   9
24                   0
23                  10
22                   7
21                   2
20                   5
 
पॉजिटिव मरीजों को ट्ै्रस कर जल्दी करा रहे हॉस्पिटलाइज्ड
कोरोना के नोडल इंचार्ज कहते हैं कि आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के जिन जिलों में मरीजों की संख्या अधिक है। उसमें प्रयागराज का रिकवरी रेट दूसरे स्थान पर है। इसके पीछे मुख्य वजह स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्य प्रणाली है। जो पूरी टीम भावना के साथ लोगों के स्वस्थ होने के लिए बेहतर तौर पर काम कर रही है।

उन्होंने रिकवरी रेट बेहतर होने के पांच मुख्य वजहें भी बताई। कहा कि एक तो मरीजों को जल्दी टै्रस करना। अगर कोई व्यक्ति पॉजिटिव आ जाता है तो उसके संपर्क में आने वालों को तुरंत टै्रैस किया जा रहा है। दूसरा ट्रैस होने के बाद उनकी तुरंत जांच कराई जा रही है। मेडिकल कॉलेज में जांच होने के बाद जल्दी रिपोर्ट आ जा रही है।

इससे मरीजों को जल्दी हॉस्पिटलाइज्ड कर कर उपचार शुरू कर दिया जा रहा है। भर्ती मरीजों के लिए बेहतर खाना भी मुहैया कराया जा रहा है। अगर कोई डायबिटिक मरीज है, तो उसे चावल नहीं दिया जा रहा है। यह सब बातें ध्यान में रखकर उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही साथ मेडिकल कॉलेज होने के कारण यहां एल-3 हॉस्पिटल की सुविधा भी है। जरूरत के मुताबिक मरीजों को वेंटिलेटर, ऑक्सीजन आदि चीजें उपलब्ध हो रही हैं। यही वजह है कि मरीजों की रिकवरी रेट अधिक है और डेथ रेट कम है। 

डॉक्टर दो-दो घंटे पर कर रहे मॉनिटरिंग
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ0 एसपी सिंह कहते हैं कि भर्ती मरीजों की लगातार दो-दो घंटे पर मॉनिटरिंग की जा रही है। सीनियर डॉक्टर भी प्रापर तरीके से देख रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सीनियर डॉक्टरों की कंसल्टेंसी दी जा रही है। इसके साथ सरकार की ओर से मरीजों को दी जा रही दवाओं का जो प्रोटोकॉल बनाया गया है। उसका फॉलो किया जा रहा है।

साथ इलेक्ट्रानिक कोविड केयर सपोर्ट नेटवर्क के तहत बीएचयू और एसजीपीआई के चिकित्सकों से मरीजों की जरूरत के मुताबिक सलाह ली जा रही है। उनको बेहतर खाना भी दिया जा रहा है। गाइडलाइन के मुताबिक मरीजों को काढ़ा दिया जा रहा है। इसके अलावा सुबह नाश्ता, दोपहर भोजन, शाम को भोजन और दूध व हल्दी मिलाकर दिया जा रहा है।ा इस वजह से रिकवरी रेट बेहतर है।
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