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पेट्रोल-डीजल की मूल्य वृद्धि पर उबाल
Wed, 24 Jun 2020 09:48 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 24 Jun 2020 09:48 PM IST
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पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार 18 दिन से बढ़ाए जाने के खिलाफ राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेताओं का कहना है कि यह मूल्य वृद्धि किसानों, मजदूरों, उपभोक्ताओं, व्यापारियों के साथ आम लोगों पर आर्थिक हमला है। यह मूल्य वृद्धि अप्रैल में उत्पादन शुल्क के अतिरिक्त है।
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एआईकेएमएस के वी वेंकटरमैया और डॉ. आशीष मित्तल ने पेट्रोल-डीजल के दाम में बढोत्तरी को जनता पर बोझ बताया है। नेताओं ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बदहाली के हालात में आर्थिक विकास के लिए अर्थशास्त्री और आमजन पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इन पदार्थो के मूल्यों में लगातार वृद्धि सरकार की असंवेदनहीनता को दर्शाता है।
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डॉ. मित्तल के मुताबिक यह मूल्य वृद्दि ऐसे समय में की गई है जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी कम हैं। इससे पहले गिरावट के दौर में सरकार ने टैक्स बढ़ाया अब मूल्य वृद्धि कर रही है। इस समय जो मूल्य वृद्धि है उसे चार रुपये 30 पैसे ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत 20.12 रुपये पड़ती है।
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प्रसंस्करण आदि के बाद यह पेट्रोल 24.62 और डीजल 26.02 रुपये पड़ता है। इस समय पेट्रोल और डीजल पर कुल एक्साइज क्रमश: 32.98 और 31.83 रुपये है। जबकि वैट 18.36 और 18.45 रुपये है। कुल सरकारी कर 51.32 रुपये है, यह उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे मूल्य का करीब 65 फीसदी है।
वक्ताओं ने कहा कि हलांकि सरकार ने रबी की फसल के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा की है, लेकिन मार्च माह में औद्योगिक उत्पादन में 16.7 फीसदी गिरावट के बाद अप्रैल में 55 फीसदी कम हो गया है। यह लोगों की आत्मनिर्भरता पर हमला है।एआईकेएमएस की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए तमाम कर माफ किए जाने की मांग की है।
नेताओं का आरोप है कि आर्थिक संकट के इस दौर में सरकार कोरोना महामारी से निपटने की योजना में गलत नीतियां बड़े पैमाने पर जिम्मेदार हैं। वहीं ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पूर्व महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद और युवा महानगर अध्यक्ष इफ्तेखार अहमद मंदर ने भी पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि को आम जनता की जेब पर डाका करार दिया है।
नेताओं ने मांग की है कि दोनों पेट्रोलियम पदार्थ जीएसटी के दायरे में लाए जाएं। लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार मूल्य वृद्धि वापस लेकर इन पर लगे सभी कर इस आर्थिक संकट के दौर में माफ करे। ताकी लोगों को राहत पहुंच सके।