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Prayagraj Magh Mela : माघ मेले में पांच हजार संस्थाओं के लिए होगा स्थान आवंटित, दलदल बनी सबसे बड़ी चुनौती

Sat, 27 Sep 2025 05:36 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 27 Sep 2025 05:36 AM IST
सार

महाकुंभ के तुरंत बाद आयोजित होने वाला माघ मेला इस बार विशेष महत्व का हो गया है। महाकुंभ में किसी कारणवश स्नान से वंचित रह गए श्रद्धालु माघ मेला 2026 के दौरान पुण्य स्नान का अवसर पाएंगे।

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Prayagraj Magh Mela: Space will be allotted for 5,000 institutions at the Magh Mela, with swamps becoming
माघ मेला। सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ के तुरंत बाद आयोजित होने वाला माघ मेला इस बार विशेष महत्व का हो गया है। महाकुंभ में किसी कारणवश स्नान से वंचित रह गए श्रद्धालु माघ मेला 2026 के दौरान पुण्य स्नान का अवसर पाएंगे। यह संयोग दुर्लभ माना जा रहा है। हर वर्ष 30 दिनों का माघ मेला इस बार 29 दिन का रहेगा। तीन जनवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में करीब 20 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

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इस बार मेले में पांच से छह हजार संस्थाओं को स्थान आवंटित किए जाने की संभावना है। लेकिन, मेले की तैयारियों के सामने सबसे बड़ी बाधा बाढ़ से प्रभावित जमीन है। इस साल पांच बार आई बाढ़ ने तकरीबन 300 से अधिक हेक्टेयर भूमि को दलदल में तब्दील कर दिया है। जबकि कुल 900 हेक्टेयर में मेले की बसावट की योजना बनाई जा रही है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक माघ मेले की बसावट के लिए भौतिक रूप से जमीन की पैमाइश की जाती है, जिसमें काफी समय लगता है।
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इस बार कराए गए सर्वे में साफ हुआ है कि दलदल की वजह से मेला बसाने के लिए 300 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की जरूरत पड़ेगी। भूमि की मैपिंग के आधार पर ही सेक्टरों का निर्धारण किया जाएगा। माना जा रहा है कि दशहरे तक गंगा और यमुना का जलस्तर नीचे आने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में अक्टूबर से तैयारियां शुरू कर पाना कठिन दिख रहा है। विभागों की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों की तैनाती भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

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खर्च पिछले साल से दोगुना

मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय किरन आनंद ने बताया कि इस बार दलदली जमीन की वजह से बसावट एरिया बढ़ाने की योजना है। नदी का जलस्तर नीचे न आने के कारण अतिरिक्त जमीन लेनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि माघ मेले की तैयारियों पर इस बार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना खर्च आने का अनुमान है। पिछले वर्ष 80 करोड़ के आसपास खर्च हुआ था।

तीन माह में तैयारी मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

सिर्फ तीन माह के भीतर जमीन की पैमाइश, टेंडर प्रक्रिया, सेक्टर वार बसावट, संस्थाओं को स्थान आवंटन और मूलभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी, शौचालय आदि) की व्यवस्था करना मेला प्राधिकरण के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। महाकुंभ के ठीक बाद होने वाला यह माघ मेला, धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, प्रशासनिक दृष्टि से भी मेला प्राधिकरण की क्षमता और तैयारी की बड़ी परीक्षा साबित होगा। उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला का कहना है कि तैयारियां शुरू हो गई है। दलदल भूमि के नाते दिक्कत जरूर आ रहीं हैं। ऐसे में अतिरिक्त लैंड लिए जाने की तैयारी की जा रहीं हैं।

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