फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj Magh Mela Scuffle with Shankaracharya supporters 12 injured Disciples observing fast joined protest

संगम तट पर हंगामा: शंकराचार्य के समर्थकों से धक्कामुक्की, 12 घायल... अन्न-जल त्याग शिष्य भी धरने पर बैठे

Mon, 19 Jan 2026 09:37 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 19 Jan 2026 09:37 AM IST
सार

मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम तट पर हंगामा हो गया। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों की पुलिस से धक्कामुक्की हो गई। धक्का-मुक्की में 12 घायल हो गए। कमर व पैर में चोट आने की वजह से तीन शिष्य अस्पताल में भर्ती हैं। शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर शिष्यों के साथ अन्न-जल त्याग धरने पर बैठ गए।

विज्ञापन
Prayagraj Magh Mela Scuffle with Shankaracharya supporters 12 injured Disciples observing fast joined protest
मौन व्रत के साथ अपने शिविर के सामने धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज एवं उनके शिष्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम के पास पुलिस से धक्कामुक्की व हंगामे में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के 12 समर्थक घायल हो गए, जिन्हें स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल भेजा गया। 
विज्ञापन


वहीं, देर शाम शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर शिष्यों के साथ अन्न-जल त्याग धरने पर बैठ गए। इस बीच इस मसले पर सियासत भी तेज हो गई है। दिन में कांग्रेस कमेटी के महासचिव विवेकानंद पाठक और देर रात पूर्व विधायक अनुग्रहण नारायण सिंह भी शंकराचार्य से मिलने पहुंच गए। 
विज्ञापन


घायलों में सात से आठ शिष्यों को पैर, हाथ, कमर व चेहरे में चोट आने की वजह से भर्ती होने के लिए कहा गया जिनमें तीन ही एसआरएन अस्पताल में रुके। वहीं, अन्य घायल शिष्यों ने भर्ती होने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


भर्ती होने वालों में शिव शक्ति, दंगल सिंह और डॉ.दुर्गा प्रसाद पचौरी शामिल हैं। इनमें शिव शक्ति, देवी प्रसाद पचौरी को कमर में और दंगल सिंह को पैर में चोट आई है। तीनों घायलों ने पुलिस पर मारने-पीटने का आरोप लगाया है। फिलहाल, ईएमओ डॉ. सत्य प्रकार का कहना है कि सोमवार को एक्सरे रिपोर्ट के बाद चोट की गंभीरता का पता चल सकेगा।
 

कंप्यूटर बाबा रथ के सामने लेट गए
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र ने आरोप लगाया कि योगीराज के अनुसार प्रशासन ने साधु-संतों को पीटा है। यह निंदनीय है। उधर धरने के दौरान कंप्यूटर बाबा रथ के सामने जाकर लेट गए। बिलखते हुए उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन शंकराचार्य से क्षमा याचना नहीं करेगा, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। देर शाम तक शंकराचार्य का धरना जारी रहा। 

माघ मेले में किसी भी धार्मिक परंपरा की शुरुआत कदाचित उचित और शास्त्र सम्मत नहीं है। जिस आयोजन में संगम में करोड़ों लोग पुण्य स्नान करने के लिए एकत्र हैं, वहां पालकी या रथ ले जाकर अव्यवस्था पैदा करना सर्वथा अनुचित है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद, देवतीर्थ गोवर्धन पीठ

 

साधु-संत इस बार के माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में देख रहे हैं तो इसकी व्यवस्था में भी संतों और धर्माचार्यों को सहयोग देना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद हमारे पूज्य हैं पर उन्हें यह भी देखना चाहिए कि मेले में जिस समय लाखों की भीड़ है और पुलिस उसकी सुरक्षा में तत्पर है तब ऐसा कुछ न किया जाए जिससे व्यवस्था बिगड़े।-महंत रविंद्र पुरी, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

संतों के साथ हुई घटना की निंदा करता हूं। शंकराचार्य भगवान कहे गए हैं। उनके शिष्यों से धक्कामुक्की करना गलत लेकिन शंकराचार्य का धरने पर बैठना उनका कार्य नहीं है। संतों के साथ प्रशासन को ऐसा नहीं करना चाहिए। जुलूस के साथ स्नान करने के लिए शंकराचार्य को भी अनुमति लेनी चाहिए थी अन्यथा सब की तरह स्नान करना चाहिए। कट्टर स्वामी, परमहंस आश्रम टीकरमाफी
 

प्रयागराज में घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। हम पांच दशक से देखते आ रहे हैं, कोई शंकराचार्य रथ या पालकी पर सवार होकर स्नान करने नहीं आए। परंपरा नहीं है तो जाना भी नहीं चाहिए। शंकराचार्य साधना में लीन रहते हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ। यह भी नहीं कहना चाहिए कि घटना प्रतिशोध की भावना से कराई गई है। जुलूस के साथ कोई शंकराचार्य स्नान करने न गए हैं और न ही जाना चाहिए।- स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी टीकरमाफी
 

प्रशासन के लोग आकर माफी मांगेंः शंकराचार्य
हंगामे के बाद शंकराचार्य शाम को अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए। आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर स्नान करने से उन्हें रोका। जहां तक धक्कामुक्की और बैरियर तोड़ने की बात है तो इस बारे में उन्हें कोई नहीं जानकारी है। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी साधु-संतों को पीट रहे हैं। संत समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनकी मांग है कि प्रशासन के लोग वहां आकर माफी मांगें।

 

पुलिस पर दुर्व्यवहार का लगाया आरोप
शंकराचार्य के शिष्य स्वामी वैष्णानंद, प्रकाश पारिक, रजनीश दुबे और बलराम तिवारी आदि ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है। उन्हें धक्का देते हुए ले जाकर घंटों बेवजह बैठाए रखा गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed