{"_id":"6162807a8ebc3e1fe1313982","slug":"prayagraj-maa-maha-kali-rough-look-not-visible-on-daraganj-road-administration-not-allowed","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रयागराज : दारागंज की सड़कों पर नहीं दिखेगा मां काली का रौद्र रूप, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रयागराज : दारागंज की सड़कों पर नहीं दिखेगा मां काली का रौद्र रूप, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
Sun, 10 Oct 2021 11:26 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:26 AM IST
विज्ञापन
Prayagraj News : महाकाली। डेमो
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पथरचट्टी के कर्णघोड़ा जुलूस के बाद अब दारागंज की सड़कों पर मां काली के ऐतिहासिक रौद्र रूप प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली। कोविड-19 के प्रोटोकॉल केे अनुपालन में सामूहिकता वाले इस आयोजन के सड़क पर करने की अनुमति न मिलने की वजह से शनिवार की रात बड़ी कोठी रिसर में मां काली के प्रदर्शन की परंपरा बचाई गई।
विख्यात मां काली के प्राकट्य व रौद्र रूप प्रदर्शन की लीला शनिवार की रात 10 बजे बड़ी कोठी परिसर में आरंभ हुई। करीब 18 किमी तक शहर की सड़कों पर होने वाले मां काली के रौद्र रूप प्रदर्शन को सीमित दायरे में मंचित कर परंपरा बचाई गई। पहले जहां इस लीला को देखने और मां की भुजाली से चोट खाने की भक्तों में होड़ रहती थी, वहीं इस बार दर्शक दूर रहे। पहले जहां यह लीला दारागंज की सड़कों पर रात भर होती थी, वहीं इस बार बड़ी कोठी परिसर में ही काली का प्रदर्शन हुआ।
सबसे पहले काली पात्र रामजी पांडेय को साफा बांधा गया। इसके बाद काले वस्त्रों से शृंगार किया गया। गले में नरमुंड की माला। हाथों में खप्पर और भुजाली से सजाया गया। कमेटी के अध्यक्ष कुल्लू यादव, महामंत्री जितेंद्र गौड़ ने नारियल बलि दी। काली संयोजक रंजन सिंह और राहुल यादव ने लोहबान की धूप और अंगियारी दिखाई।
विज्ञापन
इसके बाद मां काली के स्वरूप ने भगवान राम के चरण छूकर बड़ी कोठी परिसर में रौद्र रूप में नृत्य प्रदर्शन शुरू किया। पांच दिवसीय काली मां की सवारी का यह दूसरा दिन था। इस अवसर पर ध्रुव नारायण शुक्ला, राजेंद्र पालीवाल, अरविंद पांडेय, हीरालाल यादव, विजय सोनकर, विक्कू निषाद,पचू यादव, धर्मराज पांडेय, पवन यादव, राजा मिश्रा उपस्थित थे।
पांच दिन तक दारागंज की बड़ी कोठी में होगा रौद्र रूप का प्रदर्शन
दारागंज रामलीला कमेटी के तत्वावधान में काली पूजा पांच दिन तक चलेगी। मां काली का पैंतरा और हनुमान दल देखने के लिए पूरे पूर्वांचल से
लोग आते रहे हैं। कमेटी के मीडिया प्रभारी तीर्थराज पांडेय बच्चा भैया ने बताया कि इस बार मां का प्रदर्शन भले ही सड़कों पर नहीं हो सका, लेकिन बड़ी कोठी परिसर में ही यह परंपरा तीन दिन तक निभाई जाएगी। सड़क पर अगर कहीं जगह मिलेगी तो वहां भी मां काली भक्तों को दर्शन दे सकती हैं।
विज्ञापन
विख्यात मां काली के प्राकट्य व रौद्र रूप प्रदर्शन की लीला शनिवार की रात 10 बजे बड़ी कोठी परिसर में आरंभ हुई। करीब 18 किमी तक शहर की सड़कों पर होने वाले मां काली के रौद्र रूप प्रदर्शन को सीमित दायरे में मंचित कर परंपरा बचाई गई। पहले जहां इस लीला को देखने और मां की भुजाली से चोट खाने की भक्तों में होड़ रहती थी, वहीं इस बार दर्शक दूर रहे। पहले जहां यह लीला दारागंज की सड़कों पर रात भर होती थी, वहीं इस बार बड़ी कोठी परिसर में ही काली का प्रदर्शन हुआ।
विज्ञापन
सबसे पहले काली पात्र रामजी पांडेय को साफा बांधा गया। इसके बाद काले वस्त्रों से शृंगार किया गया। गले में नरमुंड की माला। हाथों में खप्पर और भुजाली से सजाया गया। कमेटी के अध्यक्ष कुल्लू यादव, महामंत्री जितेंद्र गौड़ ने नारियल बलि दी। काली संयोजक रंजन सिंह और राहुल यादव ने लोहबान की धूप और अंगियारी दिखाई।
विज्ञापन
इसके बाद मां काली के स्वरूप ने भगवान राम के चरण छूकर बड़ी कोठी परिसर में रौद्र रूप में नृत्य प्रदर्शन शुरू किया। पांच दिवसीय काली मां की सवारी का यह दूसरा दिन था। इस अवसर पर ध्रुव नारायण शुक्ला, राजेंद्र पालीवाल, अरविंद पांडेय, हीरालाल यादव, विजय सोनकर, विक्कू निषाद,पचू यादव, धर्मराज पांडेय, पवन यादव, राजा मिश्रा उपस्थित थे।
पांच दिन तक दारागंज की बड़ी कोठी में होगा रौद्र रूप का प्रदर्शन
दारागंज रामलीला कमेटी के तत्वावधान में काली पूजा पांच दिन तक चलेगी। मां काली का पैंतरा और हनुमान दल देखने के लिए पूरे पूर्वांचल से
लोग आते रहे हैं। कमेटी के मीडिया प्रभारी तीर्थराज पांडेय बच्चा भैया ने बताया कि इस बार मां का प्रदर्शन भले ही सड़कों पर नहीं हो सका, लेकिन बड़ी कोठी परिसर में ही यह परंपरा तीन दिन तक निभाई जाएगी। सड़क पर अगर कहीं जगह मिलेगी तो वहां भी मां काली भक्तों को दर्शन दे सकती हैं।