संगम तट स्थित प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान जी मंदिर में 14 दिनों के लंबे जलशयन के बाद शनिवार को प्रभु के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण संकटमोचन जलमग्न होकर विश्राम मुद्रा में थे। मां गंगा के वापस लौटने के बाद मठ-मंदिर परिसर शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की गूंज से जीवंत हो उठा।
बाघंबरी पीठ के महंत बलबीर गिरि जी महाराज की मौजूदगी में गंगा स्नान के बाद प्रभु का पंचामृत से भव्य अभिषेक और आकर्षक शृंगार किया गया। शाम पांच बजे महाआरती के साथ ही भक्तों ने जयकारों के बीच अपने आराध्य के दर्शन किए। मान्यता है कि मां गंगा द्वारा लेटे हनुमान जी का पाद प्रक्षालन करने के बाद प्रयागराज में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
पंचामृत से स्नान कराकर किया गया पूजन
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श्री बड़े हनुमानजी को पंचामृत से कराया गया स्नान।
- फोटो : अमर उजाला।
संगम से 800 मीटर दूर बंधवा स्थित श्री लेटे हनुमान जी के 13 दिन जलशयन के बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा/द्वितीया तिथि शनिवार भक्तों के लिए पट खुले। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हनुमान जी जलशयन को चले गए थे। 14 वें दिन उनका भव्य शृंगार किया गया। ये आस्था का संगम ही है जहां नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों में खुशी होती है। बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरि जी महाराज ने बताया कि मां गंगा के वापस जाने के बाद पंचार्मत से हनुमान जी का अभिषेक किया गया। उनकी आरती की गई।
हनुमानजी का विधि-विधान से किया गया पूजन
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दुग्ध और पंचामृत से हनुमानजी को स्नान कराते महंत बलवीर गिरी महाराज।
- फोटो : अमर उजाला।
प्रयागराज शहर के संगम तट स्थित श्री बड़े हनुमान जी मंदिर में विश्राम मुद्रा में प्रभु विराजमान हैं। मां गंगा हर साल लेटे हनुमान जी के पांव पखारने आती हैं। इस बार भी लगातार जलस्तर बढ़ा और हनुमान जी ने जलशयन किया। मंदिर में मां गंगा के वापस लौटने के बाद घंटा-घड़ियाल और शंखनाद की ध्वनि के बीच जयकारों की गूंज से पूरा प्रयागराज प्रफुल्लित हो उठा।
पूरे मंदिर परिसर की सफाई की गई
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विधिवत की गई श्री बड़े हनुमानजी मंदिर की साफ-सफाई।
- फोटो : अमर उजाला।
बाघंबरी मठ के महंत बलबीर गिरि जी महाराज ने बताया कि मान्यता है कि मां गंगा द्वारा हनुमान जी को स्नान कराने के बाद प्रयागराज में खुशियां आती है।
सुबह से ही शुरू हो गई थी सफाई
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मंदिर की सफाई करते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला।
लेटे हनुमान मंदिर में जैसे ही गंगा का पानी वापस लौटा तो प्रभु हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। 13 दिन जलशयन के बाद शनिवार पांच बजे आरती के पश्चात दर्शन के लिए मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुला।