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Prayagraj : कर्जन ब्रिज के अध्ययन के लिए आज आएगी आईआईटी रुड़की की टीम
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कर्जन ब्रिज के अध्ययन के लिए आज आएगी आईआईटी रुड़की की टीम
0 पुल के ट्रैफिक लोड की जिला प्रशासन ने भेज दी है जानकारी, सप्ताह भर हो सकता है अध्ययन
प्रयागराज। 1905 में गंगा पर बने कर्जन रेल ब्रिज पर बनाए जाने वाले संग्रहालय के पूर्व आईआईटी रुड़की की टीम उसका निरीक्षण करने के लिए सोमवार को प्रयागराज पहुंच रही है। टीम द्वारा पुल के तमाम पहलुओं की जांच की जाएगी। इस दौरान देखा जाएगा कि पुल के ढांचे से बिना किसी तरह की छेड़छाड़ के बिना वहां संग्रहालय का निर्माण किस तरह से किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सप्ताह भर यह टीम प्रयागराज में ही रहेगी।
आईआईटी रुड़की की टीम इसके पहले भी कर्जन बिज का अध्ययन एक बार कर चुकी है। 100 वर्ष से ज्यादा इस पुराने पुल को लेकर आईआईटी रुड़की की टीम ने जिला प्रशासन से पुल के ट्रैफिक लोड का भी डाटा मांगा था। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से यह डाटा उसे उपलब्ध करवाया दिया गया है। इस बीच सीएम योगी के समक्ष शनिवार को ही वीडियो कांफ्रेंस के जरिए जिला प्रशासन ने कर्जन पुल को लेकर अपना प्रस्तुतिकरण भी कर दिया है। प्रशासन की ओर से सीएम को अवगत कराया गया है कि पुल के ढांचे में बिना किसी बदलाव के उसमें संग्रहालय बनाया जाएगा। मंडलायुक्त संजय गोयल का कहना है कि आईआईटी रुड़की की ओर से कई तरह के विवरण मांगे गए हैं। इसमें ट्रैफिक लोड का भी विवरण शामिल है। अब सोमवार को टीम एक बार फिर से ब्रिज का अध्ययन करने के लिए प्रयागराज आ रही है।
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दिसंबर 1905 में पुल पर शुरू हुआ था ट्रेनों का संचालन
0 बताया जाता है कि नवंबर, 1902 में प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में गंगा पुल पर कर्जन ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया था। उस वक्त यह इलाहाबाद-फैजाबाद रेलखंड में आता था, जो अवध रुहेलखंड रेलवे का हिस्सा था। ब्रिज का निर्माण कार्य जनवरी, 1905 में पूरा हुआ और दिसंबर, 1905 में पुल पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया था। इंजीनियर रॉबर्ट रिचर्ड गेल्स के नेतृत्व में पुल का निर्माण कार्य पूरा हुआ था।
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0 पुल के ट्रैफिक लोड की जिला प्रशासन ने भेज दी है जानकारी, सप्ताह भर हो सकता है अध्ययन
प्रयागराज। 1905 में गंगा पर बने कर्जन रेल ब्रिज पर बनाए जाने वाले संग्रहालय के पूर्व आईआईटी रुड़की की टीम उसका निरीक्षण करने के लिए सोमवार को प्रयागराज पहुंच रही है। टीम द्वारा पुल के तमाम पहलुओं की जांच की जाएगी। इस दौरान देखा जाएगा कि पुल के ढांचे से बिना किसी तरह की छेड़छाड़ के बिना वहां संग्रहालय का निर्माण किस तरह से किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सप्ताह भर यह टीम प्रयागराज में ही रहेगी।
आईआईटी रुड़की की टीम इसके पहले भी कर्जन बिज का अध्ययन एक बार कर चुकी है। 100 वर्ष से ज्यादा इस पुराने पुल को लेकर आईआईटी रुड़की की टीम ने जिला प्रशासन से पुल के ट्रैफिक लोड का भी डाटा मांगा था। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से यह डाटा उसे उपलब्ध करवाया दिया गया है। इस बीच सीएम योगी के समक्ष शनिवार को ही वीडियो कांफ्रेंस के जरिए जिला प्रशासन ने कर्जन पुल को लेकर अपना प्रस्तुतिकरण भी कर दिया है। प्रशासन की ओर से सीएम को अवगत कराया गया है कि पुल के ढांचे में बिना किसी बदलाव के उसमें संग्रहालय बनाया जाएगा। मंडलायुक्त संजय गोयल का कहना है कि आईआईटी रुड़की की ओर से कई तरह के विवरण मांगे गए हैं। इसमें ट्रैफिक लोड का भी विवरण शामिल है। अब सोमवार को टीम एक बार फिर से ब्रिज का अध्ययन करने के लिए प्रयागराज आ रही है।
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दिसंबर 1905 में पुल पर शुरू हुआ था ट्रेनों का संचालन
0 बताया जाता है कि नवंबर, 1902 में प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में गंगा पुल पर कर्जन ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया था। उस वक्त यह इलाहाबाद-फैजाबाद रेलखंड में आता था, जो अवध रुहेलखंड रेलवे का हिस्सा था। ब्रिज का निर्माण कार्य जनवरी, 1905 में पूरा हुआ और दिसंबर, 1905 में पुल पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया था। इंजीनियर रॉबर्ट रिचर्ड गेल्स के नेतृत्व में पुल का निर्माण कार्य पूरा हुआ था।
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