Prayagraj: एक दिन पहले हुई थी बात घर आने का किया था वादा
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सीआरपीएफ जवान व उसके परिवार की मौत की खबर मेजा स्थित उसके पैतृक घर पहुंची तो वहां कोहराम मच गया। परिजन बेटे के आने की बाट जोह रहे थे। बताया कि विनोद ने एक दिन पहले ही पत्नी-बच्चों को लेकर घर आने का वादा किया था।
विनोद के पिता बालमुकुंद यादव पुलिस विभाग से दरोगा के पद से रिटायर हैं। उनके चार बेटों में विनोद सबसे बड़ा था। दो भाई प्रमोद व अमन गांव में ही रहते हैं, जबकि तीसरे नंबर का भाई सुधीर दिल्ली में ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करता है। परिवारवालों ने बताया कि 2001 में विनोद की नौकरी सीआरपीएफ में लगी थी। दो साल पहले वह वाराणसी से स्थानांतरित होकर फाफामऊ स्थित ग्रुप सेंटर में आया और फिर परिवार समेत वहीं रहने लगा। पिता ने बताया कि एक दिन पहले ही उनकी फोन पर विनोद से बात हुई थी।
लॉकडाउन में स्कूल भी बंद था, जिस पर उन्होंने बच्चों को गांव छोड़ने को कहा। विनोद भी राजी हो गया। उसने वादा किया था कि शनिवार को वह पत्नी व बच्चों को लेकर घर आएगा। सभी उसकी राह देख रहे थे। वह तो नहीं आया लेकिन उसकी मौत की खबर आ गई। बिलखते परिजनों ने बताया कि विनोद अपने दोनों बच्चों से बेहद प्यार करता था। वह यह मानने को भी तैयार नहीं थे कि उसने अपने परिवार की हत्या कर दी। बेटे, बहू व बच्चों की मौत पर मां नवरंगी देवी तो बदहवास सी हो गईं थीं।
उधर, घटना की जानकारी पर रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में आसपास के लोग भी जमा हो गए। ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। जानकारी पर ग्रुप सेंटर पहुंचे प्रदीप व अमन ने भाई, भाभी व बच्चों की खून से लथपथ लाशें देखीं तो उनकी भी आंखें नम हो र्गईं। पुलिस अफसरों की पूछताछ में वह दोनों भी यही कहते रहे कि एक दिन पहले ही पिता से फोन पर बातचीत हुई थी। तब उन्होंने किसी तरह के तनाव की बात नहीं बताई थी।