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Prayagraj Flood : खत्म हो गया घर का राशन, भूखों रहने की नाैबत आई तो मिली नाव

Tue, 05 Aug 2025 01:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 05 Aug 2025 01:16 PM IST
सार

Prayagraj Flood News : बेली कॉलोनी के मोहम्मद इमामुलहक अंसारी पत्नी और दो बच्चों के साथ तीन दिनों से बाढ़ में फंसे थे। उन्होंने बताया कि रविवार को उनके क्षेत्र की बिजली भी गुल हो गई। उन्होंने राशन का इंतजाम किया था लेकिन वह खत्म हो गया।

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Prayagraj Flood: The ration at home got over, when the situation of starvation came, we got a boat
छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घर आने जाने के लिए नाव का सहारा लेते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेली कॉलोनी के मोहम्मद इमामुलहक अंसारी पत्नी और दो बच्चों के साथ तीन दिनों से बाढ़ में फंसे थे। उन्होंने बताया कि रविवार को उनके क्षेत्र की बिजली भी गुल हो गई। उन्होंने राशन का इंतजाम किया था लेकिन वह खत्म हो गया। भूखे रहने की नाैबत आ गई। वहां से निकलने के लिए कई बार फोन किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। लगातार प्रयास के बाद सोमवार को नाव मिली। नाव वाले ने छह लेन पुल के पास छोड़ा। अंसारी का कहना है कि वह नजदीक में ही कहीं कमरा लेकर रहेंगे। उनका कहना था कि कॉलोनी में कई अन्य लोग भी फंसे हैं। उनमें से कई लोग निकलना चाहते हैं लेकिन नाव ही नहीं मिल पा रही।

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सामान छत पर ढककर परिचित के यहां ली शरणऊंचवागढ़ी के जयनाथ ने काफी भीतर मकान बनवा रखा है। उनका प्रथम तल डूब गया है। सामान छत पर रखकर तिरपाल से ढक दिए हैं। उन्होंने परिवार को ब्लड बैंक के पास एक परिचित के यहां छोड़ रखा है। वह सामान देखने के लिए रोजाना किसी तरह से घर जाते हैं और शाम को लौट जाते हैं। पास में ही रहने वाले सुधांशु का कहना है कि जल्द ही परीक्षाएं हैं। छोड़कर भी नहीं जा सकते। बहुत खराब स्थिति है। कमर भर पानी में डूबकर निकलते हैं और किसी तरह से जरूरी सामान का इंतजाम करते हैं।

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Prayagraj Flood: The ration at home got over, when the situation of starvation came, we got a boat
मकान का पहला तल डूबने के बाद कुछ इस तरह बाहर निकलता युवक। - फोटो : अमर उजाला

बाढ़ में घर डूबा तो राहत शिविर में ली शरण

महबूब अली स्कूल में बने राहत शिविर में रह रहीं शबाना यास्मीन एवं मोहम्मद चांद का कहना था कि उनका पूरा घर डूब गया है। छत पर तखत के ऊपर सामान रखकर तिरपाल से ढका है। उनका कहना है कि सामान चोरी न हो जाए, इसके लिए रोजाना देखने के लिए जाना पड़ता है। किसी तरह से नाव से घर जाते हैं।

अंकपत्र तो निकाल लिया लेकिन हारमोनियम-तबला अब भी फंसा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की संगीत की छात्रा म्योराबाद कछार में किराए पर रहती हैं। उनके घर में पानी घुस गया है। हारमोनियम, तबला समेत अन्य वाद एवं अन्य जरूरी सामान कमरे के ताड़ पर रखकर वह तेलियरगंज अपने परिचित के यहां चली गईं। पानी बढ़ने लगा तो याद आया कि अंकपत्र समेत अन्य एकेडमिक दस्तावेज वहीं हैं। सोमवार को कमर तक पानी में घुसकर वह किसी तरह से कमरे पर पहुंची और अपना दस्तावेज लेकर आईं लेकिन उन्हें अपने वाद्य यंत्रों तथा अन्य जरूरी सामान की चिंता सता रही है।

Prayagraj Flood: The ration at home got over, when the situation of starvation came, we got a boat
अशोक नगर चौराहे स्थित ऋषिकुल विद्यालय राहत शिविर में आश्रय लिए लोग - फोटो : अमर उजाला

जोखिम में जान, छत पर दौड़ा दिए बिजली के तार

बेली गांव स्थित सुंदरम कॉलोनी गयासुद्दीन तथा आसपास के लोगों ने तो बिजली, पानी समेत अन्य जरूरी वस्तुओं के लिए जान भी जोखिम में डाल दी है। उनके घरों का भूतल डूबने को है, इसलिए पूरा परिवार ऊपरी तल पर चला गया है। तीन दिन पहले ही क्षेत्र की बिजली कट गई। ऐसे में पीने के पानी, मोबाइल चार्ज करने की भी समस्या बन गई तो लोगों ने छत पर ही बिजली के तार दौड़ा दिए हैं। कुछ दूर ऊंचाई पर अभी पानी नहीं पहुंचा है और बिजली आ रही है। कई परिवारों ने एक से दूसरे छत पर होते हुए केबल दौड़ाकर वहां से कनेक्शन ले लिया है। लोगों ने ऊपर ही एक बिजली बोर्ड लगा रखा है और उसी में कनेक्शन ले रखे हैं।

Prayagraj Flood: The ration at home got over, when the situation of starvation came, we got a boat
सलोरी इलाके में बाढ़ के पानी में डूबी पहली मंजिल तो लोग दूसरी मंजिल पर शरण लेने को मजबूर हो गए है - फोटो : अमर उजाला

नहाना तो भूल गए हैं, बस पीने को पानी मिल जाए

बेली गांव स्थित सुंदरम कॉलोनी के शेबू पत्नी और बच्चों के साथ बाढ़ में फंसे हैं। भूतल डूब गया है इसलिए पहले तल पर रहने के लिए आ गए हैं। उनके पड़ोस में कई अन्य परिवार भी फंसे हैं। उनका कहना है कि पानी, खाना सभी की दिक्कत हो गई है। चार दिनों से नाव और एनडीआरएफ के लिए फोन कर रहे हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिली। नहाना तो सभी भूल गए हैं। बस पीने के पानी का इंतजाम किसी तरह से कर पा रहे हैं।

Prayagraj Flood: The ration at home got over, when the situation of starvation came, we got a boat
दारागंज के निचले इलाके में बाढ़ के पानी से कुछ इस तरह आते-जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

तीन दिनों से बाढ़ में फंसी घायल महिला को एसडीआरएफ ने निकाला

तीन दिनों से घायल अवस्था में बाढ़ में फंसी ज्ञानवती देवी के लिए एसडीआरएफ की टीम सोमवार को देवदूत बनकर सामने आई। ज्ञानवती बीमार होने के साथ एक द़ुर्घटना में घायल हो गई थीं। इसकी वजह से वह गंगानगर स्थित अपने घर में ही रह रहीं थीं और बाढ़ आने पर फंस गईं। वह उठने बैठने में भी असमर्थ थीं। सेना में कार्यरत उनके पति तुफानी ने किसी तरह से एसडीआरएफ के लोगों से संपर्क किया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम उनके घर पहुंचीं। डीएम मनीष कुमार वर्मा, सीआरओ कुंवर पंकज भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद ज्ञानवती देवी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। डीएम के निर्देश पर उन्हें एंबुलेंस आदि सुविधाएं मुहैया कराई गईं और वे लोग लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

राहत शिविर में ली ऑनलाइन क्लास

- बेली कछार में रहने वाली चंद्रप्रभा के घर में काफी ऊपर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इसकी वजह से मां, पिता, भाई के साथ वह महबूब अली इंटर कॉलेज परिसर में बने शिविर में रह रही हैं। चंद्रप्रभा मेरी वाना लूकर में बारहवीं की छात्रा हैं और शिविर में रहकर ही ऑनलाइन क्लास कर रही हैं। भाई भी मां के साथ आईटीआई का फार्म भरने गया था। पिता की कचहरी के पास दुकान है लेकिन बारिश की वजह से वह नहीं जा पाए।

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