Prayagraj : 42 वर्ष की हुई प्रयागराज एक्सप्रेस, शान, शौकत और रफ्तार ने बनाई एनसीआर की वीवीआईपी ट्रेन
संगम नगरी को नई दिल्ली से जोड़ने वाली और उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की धड़कन कही जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस बृहस्पतिवार को अपना जन्मदिन मना रही है। कभी महज 17 लाल डिब्बों के साथ पटरियों पर दौड़ने वाली यह ट्रेन आज देश की वीवीआईपी ट्रेनों में शुमार है।
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संगम नगरी को नई दिल्ली से जोड़ने वाली और उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की धड़कन कही जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस बृहस्पतिवार को अपना जन्मदिन मना रही है। कभी महज 17 लाल डिब्बों के साथ पटरियों पर दौड़ने वाली यह ट्रेन आज देश की वीवीआईपी ट्रेनों में शुमार है। 16 जुलाई को इसके संचालन के 42 वर्ष पूरे हो गए।
प्रयागराज एक्सप्रेस के सफर की शुरुआत 16 जुलाई 1984 को हुई थी। तत्कालीन केंद्र सरकार में मंत्री रहीं राजेंद्र कुमारी बाजपेयी के अथक प्रयासों से इस ट्रेन की सौगात इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को मिली थी। यह वैक्यूम ब्रेक से लैस 17 लाल रंग के कोचों के साथ चलती थी। शुरुआती दौर में इसके महज दो स्टॉपेज कानपुर और अलीगढ़ ही रखे गए थे। अब फतेहपुर एवं टूंडला में भी इस ट्रेन का ठहराव है।
कमाई और लोकप्रियता में भी अव्वल
प्रयागराज एक्सप्रेस न सिर्फ यात्रियों की पहली पसंद है, बल्कि यह एनसीआर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ट्रेन भी है। इस वर्ष जनवरी से जून तक इस ट्रेन ने रेलवे की झोली में 8.75 करोड़ रुपये की कमाई डाली है। दिल्ली जाने वाले यात्रियों की यह ट्रेन पहली पसंद है।
अमर उजाला की वजह से वर्ष 2019 में पहली बार मना था जन्मदिन
अमर उजाला के चलाए गए विशेष अभियान के बाद रेलवे प्रशासन ने पहली बार वर्ष 2019 में प्रयागराज एक्सप्रेस के 35 वर्ष पूरे होने पर इसका जन्मदिन मनाया था। कार्यक्रम में तत्कालीन महाप्रबंधक राजीव चौधरी और डीआरएम अमिताभ समेत कई आला अधिकारी शामिल हुए थे। प्रयागराज फैंस क्लब भी जन्मदिन समारोह में शिरकत कर रहा है।
प्रयागराज एक्सप्रेस से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- देश की एकमात्र ऐसी ट्रेन है जो 24 एलएचबी कोचों के साथ दौड़ती है पटरियों पर।
- बेहतरीन सेवाओं के लिए आईएसओ 9001 सर्टिफिकेट से भी नवाजा जा चुका है प्रयागराज एक्सप्रेस को।
- शुरुआत में इस ट्रेन का था सिर्फ कानपुर और अलीगढ़ स्टेशन पर ठहराव।
- 16 दिसंबर 2016 को ट्रेन में लगे आधुनिक एलएचबी रेक।
- एनसीआर की एकमात्र ट्रेन जिस पर बनाई जा चुकी है डाक्यूमेंट्री।
- ट्रेन की शुरुआत के दौरान थे लाल रंग वाले 17 कोच।
मेरी दादी स्व. राजेंद्र कुमारी बाजपेयी के प्रयास से ही संगम नगरी को प्रयागराज एक्सप्रेस मिली। मैं इस ट्रेन से ही नई दिल्ली जाना पसंद करता हूं। - हर्षवर्धन बाजपेई, विधायक, शहर उत्तरी विधानसभा