Prayagraj : फाइलों में अटका महंगाई भत्ता का आदेश, जिंदगी हार गए पांच गुरु जी
महंगाई भत्ते के लिए 22 शिक्षक वर्षों से विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आदेश तो जारी हो गए लेकिन अब तक एक चवन्नी भी उनके हाथ नहीं लगी। इंतजार और उपेक्षा का यह सिलसिला इतना लंबा खिंच गया कि इस दौरान पांच शिक्षकों की मौत भी हो गई।
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महंगाई भत्ते के लिए 22 शिक्षक वर्षों से विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आदेश तो जारी हो गए लेकिन अब तक एक चवन्नी भी उनके हाथ नहीं लगी। इंतजार और उपेक्षा का यह सिलसिला इतना लंबा खिंच गया कि इस दौरान पांच शिक्षकों की मौत भी हो गई। अब उनके परिजन दर-दर भटक रहे हैं। बहादुरपुर विकास खंड की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए ये शिक्षक बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को संवार रहे थे पर आज इनके परिवार का भविष्य ही अधर में है। सवाल उठता है कि मौत के बाद भी यदि न्याय केवल फाइलों में अटका रहेगा तो जिले के जीवित शिक्षक किस उम्मीद से सेवा देंगे।
शिक्षकों की लड़ाई लड़ रहे सेवानिवृत्त शिक्षक गोपीकृष्ण तिवारी का कहना है कि लंबित महंगाई भत्ते की रकम मिलने से कई परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती थी लेकिन लापरवाही और खींचतान ने उन्हें हताश कर दिया है। उधर वित्त एवं लेखाधिकारी नीतू सिंह यादव का कहना है कि अवशेष महंगाई भत्ता भुगतान कर दिया गया है। बड़ी बात यह है कि जिन शिक्षकों का जीवन संघर्ष में ही समाप्त हो गया, उनके परिजन अब भी अधिकारियों के आश्वासन के भरोसे ही जी रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और विभाग अगर समय पर उनकी सुध ले लेते तो शायद हालात इतने खराब न होते।
विलंब समिति में मामला दर्ज, होगी सुनवाई
मामला अब वित्तीय एवं प्रशासकीय विलंब समिति में दर्ज किया गया है। समिति के सभापति रतनपाल सिंह ने कहा है कि प्रकरण संज्ञान में आया है। दोनों पक्षों से साक्ष्य मांगे जाएंगे और उन्हीं के आधार पर सुनवाई की जाएगी।
यह है मामला
वर्ष 2013-2014 में सेवानिवृत्त होने के बाद गोपी कृष्ण तिवारी, भगवती प्रसाद श्रीवास्तव, संतलाल यादव, प्रेमा जायसवाल, अमर पाल, रामसंजीवन, वंश नारायण, चंद्रमणि मिश्र, बसंत कुमार, रमाशंकर शुक्ल, लक्ष्मीकांत शुक्ल, निजामुद्दीन, रामकिसुन भारतीया, शैल कुमारी, भगौती प्रसाद पांडेय, रमाशंकर पांडेय, गया प्रसाद, रामचंद्र भारतीया, राम सिंह, हरीश बाजपेयी, रामदेव द्विवेदी, पप्पी समेत 22 अध्यापकों की सेवा के दौरान देय तकरीबन 13 लाख रुपये महंगाई भत्ते का भुगतान नहीं किया गया। बीएसए, मंडलायुक्त और मंडलीय पेंशन कोर्ट संबंधित अधिकारियों को भुगतान के आदेश दे चुके हैं।