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Prayagraj: एसआरएन में कोरोना मरीज की मौत, दो दिन पहले निगेटिव आ गई थी रिपोर्ट
Sat, 30 May 2020 10:52 AM IST
विनोद सिंह
news desk amar ujala, prayagraj
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Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 30 May 2020 10:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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स्वरूपरानी चिकित्सालय में शनिवार को एक वृद्ध की मौत हो गई। उसे फेफड़ों की बीमारी थी। 2 दिन पहले हुई उसकी कोरोना की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बाद उसे कोरोना वार्ड से हटाकर टीवी एवं चेस्ट रोग विभाग की देखरेख में कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती कर दिया गया था। मौत के बाद उसके शव को दफनाने को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। लेकिन बाद में कोरोना संक्रमित न होने की बात पता चलने पर वे मान गए और शव का अंतिम संस्कार करने दिया।
बहरिया ब्लाक के एक गांव का रहने वाला वृद्ध 15 मई को मुंबई से अपने बेटे के साथ लौटा था। 20 मई को उसके और उसके बेटे की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद पिता-पुत्र को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के कोरोना संदिग्ध वार्ड नंबर में भर्ती करा दिया गया। 8 दिन रहने के बाद उसकी दोबारा कोरोना की जांच कराई गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद पिता-पुत्र को छुट्टी दे दी गई।
बुजुर्ग की तबीयत ठीक न होने की वजह से उसे टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग की देखरेख में वार्ड नंबर 9 में 28 मई को शिफ्ट कर दिया गया। वहां रविवार की भोर में उसकी मौत हो गई। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एस पी सिंह ने बताया कि बुजुर्ग फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित था, जिससे उसको सांस लेने में लगातार दिक्कत हो रही थी। वृद्ध के शव को परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव को लेकर गांव चले गए। वहां शव को दफनाना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया, लेकिन घरवालों ने बताया कि मृतक कोरोना मुक्त है, तब स्थानीय लोग शांत हो गए और घर वालों ने अंतिम संस्कार कर दिया।
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बहरिया ब्लाक के एक गांव का रहने वाला वृद्ध 15 मई को मुंबई से अपने बेटे के साथ लौटा था। 20 मई को उसके और उसके बेटे की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद पिता-पुत्र को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के कोरोना संदिग्ध वार्ड नंबर में भर्ती करा दिया गया। 8 दिन रहने के बाद उसकी दोबारा कोरोना की जांच कराई गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद पिता-पुत्र को छुट्टी दे दी गई।
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बुजुर्ग की तबीयत ठीक न होने की वजह से उसे टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग की देखरेख में वार्ड नंबर 9 में 28 मई को शिफ्ट कर दिया गया। वहां रविवार की भोर में उसकी मौत हो गई। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एस पी सिंह ने बताया कि बुजुर्ग फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित था, जिससे उसको सांस लेने में लगातार दिक्कत हो रही थी। वृद्ध के शव को परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव को लेकर गांव चले गए। वहां शव को दफनाना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया, लेकिन घरवालों ने बताया कि मृतक कोरोना मुक्त है, तब स्थानीय लोग शांत हो गए और घर वालों ने अंतिम संस्कार कर दिया।
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