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Prayagraj: करोड़ों का भुगतान किए बगैर गायब हुए चाइनीज कंपनी के अफसर

Thu, 16 Jul 2020 01:12 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Jul 2020 01:12 AM IST
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Prayagraj: Chinese company officers disappeared without paying crores
prayagraj news - फोटो : prayagraj
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ईडीएफसीसी) के सिग्नलिंग का ठेका समाप्त करने के बाद चीनी कंपनी द्वारा भुगतान न करने से नाराज ठेकेदारों ने बुधवार को प्रदर्शन किया।
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मेयोहाल चौराहे के पास चीनी कंपनी बीजिंग रेलवे रिसर्च एंड सिग्नल कम्युनिकेशन कंपनी के दफ्तर पर पहुंचे ठेकेदारों ने कहा कि कंपनी द्वारा ठेकेदारों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस बीच वहां ठेकेदारों को वहां चीनी अफसरों की जगह कुछ भारतीय कर्मचारी जरूर मिले। उन कर्मचारियों ने कहा कि ठेका निरस्त होने के बाद से चीनी अफसर ऑफिस नहीं आ रहे और न ही उन्होंने यहां इस संबंध में किसी से कोई संपर्क किया।
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दरअसल, रेलवे द्वारा पिछले माह ही भारत-चीन सीमा विवाद एवं 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद  चीनी कंपनी के सिग्नलिंग का ठेका निरस्त कर दिया। डीएफसीसीएल ने कानपुर से लेकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय  तक 417 किमी सिग्नलिंग के लिए 471 करोड़ रुपये का टेंडर किया था।
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यह टेंडर बीजिंग रेलवे रिसर्च एंड सिग्नल कम्युनिकेशन कंपनी को मिला था। रेलवे द्वारा पिछले माह ठेका निरस्त करने के बाद से ठेकेदार अपने भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को उनका धैर्य जवाब दे गया। काफी संख्या में संबंधित कंपनी के स्थानीय ठेकेदार मेयोहाल स्थित कार्यालय पहुंच गए। ठेकेदारों ने कहा कि 50 से ज्यादा ठेकेदारों का भुगतान कंपनी ने नहीं किया है।


भुगतान की कुल राशि 25 करोड़ रुपये है। ठेेकेदारों ने यह भी कहा कि वह ईडीएफसीसी के कार्यालय भी गए, लेकिन वहां कोई भी अफसर उनसे नहीं मिला। अब चाइनीज कंपनी के अफसर भी गायब है। ऐसे में वह जाएं भी तो कहां जाएं।  इस दौरान आरके मिश्र, रवि कुशवाहा, रविंद्र चौधरी, बब्बू तिवारी, हर्ष मिश्र, विजय पटेल, राम लखन यादव आदि मौजूद रहे। ठेकेदारों ने बताया कि लॉक डाउन लगने के बाद से ही उनका चाइनीज कंपनी के अफसरों से संपर्क नहीं हुआ। उसके पहले वह एक चीपी एप के माध्यम से ठेकेदारों से मीटिंग करते थे।

जिस चाइनीज कंपनी का ठेका निरस्त किया गया है उसे 19 करोड़ का भुगतान किया गया था। संबंधित कंपनी को ही ठेकेदारों द्वारा कराए गए काम का भुगतान करना है।
- वेद प्रकाश, सीपीआरओ डीएफसीसी।

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