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प्रयागराजः पुलिस की चूक से अभियुक्त को मिली जमानत
Tue, 21 May 2019 12:44 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 21 May 2019 12:44 AM IST
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Absconding Ahmedabad serial blasts (2008) accused Nasir Rangrej arrested
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रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में कोर्ट ने अभियुक्त अविनाश दुबे की जमानत याचिका मंजूर कर ली और जमानतें दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। अभियुक्तगण पर गत दिनों सागर रत्ना रेस्टोरेंट पर बमबाजी करने का आरोप है। पुलिस ने सात मिनट के भीतर दो अलग-अलग थानाक्षेत्रों में दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी दिखाकर तकनीकी चूक की। यह आदेश एडीजे वीरभद्र ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता धीरेन्द्र ओझा को सुनकर दिया है।
प्रकरण जार्ज टाऊन थाने का है। वादी सुनील अथवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके रेस्टोरेंट पर कुछ अज्ञात लोगाें ने 23 फरवरी को हमला किया था। जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसे फोन कर रंगदारी की मांग कर जान से मारने की धमकी दी गई थी। प्रकरण में अभियुक्त अविनाश दुबे की ओर से जमानत पर बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि जिस मोबाइल फोन से वादी को धमकी देने की बात की गई है उससे अभियुक्त का कोई संबंध नहीं है।
अभियुक्त की गिरफ्तारी जार्जटाउन पुलिस ने फर्जी और मनगढ़ंत दिखाई है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया है कि पुलिस ने जीडी में अभियुक्त की गिरफ्तारी नौ अप्रैल 2019 को साढे़ बारह बजे दिखाई है । और सात मिनट बाद ही मीरापुर अतरसुइया थाना क्षेत्र से जाकर एक अन्य अभियुक्त को किसी दूसरे अपराध में गिरफ्तारी किए जाने का हवाला दिया है। सात मिनट के भीतर उन्हीं पुलिसकर्मियों का जार्जटाउन से अतरसुइया जैसे भीड़ भाड़ वाले इलाके में पहुंचकर गिरफ्तारी कर पाना मुमकिन नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर कर ली है।
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प्रकरण जार्ज टाऊन थाने का है। वादी सुनील अथवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके रेस्टोरेंट पर कुछ अज्ञात लोगाें ने 23 फरवरी को हमला किया था। जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसे फोन कर रंगदारी की मांग कर जान से मारने की धमकी दी गई थी। प्रकरण में अभियुक्त अविनाश दुबे की ओर से जमानत पर बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि जिस मोबाइल फोन से वादी को धमकी देने की बात की गई है उससे अभियुक्त का कोई संबंध नहीं है।
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अभियुक्त की गिरफ्तारी जार्जटाउन पुलिस ने फर्जी और मनगढ़ंत दिखाई है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया है कि पुलिस ने जीडी में अभियुक्त की गिरफ्तारी नौ अप्रैल 2019 को साढे़ बारह बजे दिखाई है । और सात मिनट बाद ही मीरापुर अतरसुइया थाना क्षेत्र से जाकर एक अन्य अभियुक्त को किसी दूसरे अपराध में गिरफ्तारी किए जाने का हवाला दिया है। सात मिनट के भीतर उन्हीं पुलिसकर्मियों का जार्जटाउन से अतरसुइया जैसे भीड़ भाड़ वाले इलाके में पहुंचकर गिरफ्तारी कर पाना मुमकिन नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर कर ली है।
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