{"_id":"5f1328718ebc3e9ff12e0cec","slug":"prayagraj-ac-light-and-fans-of-trains-running-on-electric-engines","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रयागराजः इलेक्ट्रिक इंजन से ही चल रहे ट्रेनों के एसी, लाइट और पंखे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रयागराजः इलेक्ट्रिक इंजन से ही चल रहे ट्रेनों के एसी, लाइट और पंखे
Sat, 18 Jul 2020 11:17 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 18 Jul 2020 11:17 PM IST
विज्ञापन
prayagraj news
- फोटो : prayagraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने प्रयागराज एक्सप्रेस समेत अपनी 16 ट्रेनों के एसी, पंखे एवं लाइट को उसके इंजन के माध्यम से चलना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में ऐसी सभी ट्रेनें जो एलएचबी रेक से लैस हैं उन सभी मेें लगे इंजन से उनके कोच के एसी, पंखे एवं लाइट आदि चलेंगी।
इस व्यवस्था से रेलवे को हर वर्ष करोड़ों रुपये का डीजल भी बचेगा। यह संभव होगा हेड ऑन जनरेशन (एचओजी ) के उपयोग से। एनसीआर प्रशासन ने इसके उपयोग से अब तक 75 हजार लीटर डीजल की बचत भी की है।
दरअसल पांरपरिक रूप से एलएचबी कोच वाली ट्रेनों में लाइट, पंखे, एसी आदि के लिए रेक के दोनों छोर पर दो जनरेटर कारें लगी होती है। जो डीजल से चलती हैं। इसकी तेज आवाज से भी यात्रियों को परेशानी होती है। इस समस्या को देखते हुए रेलवे ने पिछले वर्ष ही इलेक्ट्रिक इंजन से कोचों को बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था की।
विज्ञापन
इसे हेड ऑन जेनरेशन कहा जाता है। जो 25 हजार वोल्ट ओवरहेड वायर से ट्रैक्शन एनर्जी के एक हिस्से को एलएचबी कोच की बिजली की आवाश्यकता को पूरा करने के लिए ट्रांसफार्मर और कनवर्टर के माध्यम से 750 वोल्ट में परिवर्तित कर देता है। ऐसे में बिना जेनरेटर चलाए संबंधित ट्रेन के सभी कोच में लगे पंखे, लाइट एवं एसी चल जाते हैं। इस तकनीक का प्रयोग करने में एनसीआर अन्य जोनल रेलवे मुकाबले से अब आगे है। फिलहाल जोन के 41 इंजन में एचओजी कनर्वटर लगाया जा चुका है।
एनसीआर के सीपीआरओ अजीत सिंह ने बताया कि इंजन ओर रेक की एचओजी प्रणाली में कोई कमी न हो इसके लिए इसमें कानपुर शेड द्वारा टेस्ट स्विच का प्रावधान किया गया है। इस स्विच के प्रयोग से इंजन के एचओजी कनर्वटर के परीक्षण के लिए उसे रेक से जुड़े रहने की आवश्यकता नहीं होती। कहा कि रेलवे बोर्ड द्वारा पिछले वर्ष के 20 सर्वश्रेष्ठ काम में इसे भी शामिल किया गया है।
आज 35 बसों का संचालन
विज्ञापन
इस व्यवस्था से रेलवे को हर वर्ष करोड़ों रुपये का डीजल भी बचेगा। यह संभव होगा हेड ऑन जनरेशन (एचओजी ) के उपयोग से। एनसीआर प्रशासन ने इसके उपयोग से अब तक 75 हजार लीटर डीजल की बचत भी की है।
विज्ञापन
दरअसल पांरपरिक रूप से एलएचबी कोच वाली ट्रेनों में लाइट, पंखे, एसी आदि के लिए रेक के दोनों छोर पर दो जनरेटर कारें लगी होती है। जो डीजल से चलती हैं। इसकी तेज आवाज से भी यात्रियों को परेशानी होती है। इस समस्या को देखते हुए रेलवे ने पिछले वर्ष ही इलेक्ट्रिक इंजन से कोचों को बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था की।
विज्ञापन
इसे हेड ऑन जेनरेशन कहा जाता है। जो 25 हजार वोल्ट ओवरहेड वायर से ट्रैक्शन एनर्जी के एक हिस्से को एलएचबी कोच की बिजली की आवाश्यकता को पूरा करने के लिए ट्रांसफार्मर और कनवर्टर के माध्यम से 750 वोल्ट में परिवर्तित कर देता है। ऐसे में बिना जेनरेटर चलाए संबंधित ट्रेन के सभी कोच में लगे पंखे, लाइट एवं एसी चल जाते हैं। इस तकनीक का प्रयोग करने में एनसीआर अन्य जोनल रेलवे मुकाबले से अब आगे है। फिलहाल जोन के 41 इंजन में एचओजी कनर्वटर लगाया जा चुका है।
एनसीआर के सीपीआरओ अजीत सिंह ने बताया कि इंजन ओर रेक की एचओजी प्रणाली में कोई कमी न हो इसके लिए इसमें कानपुर शेड द्वारा टेस्ट स्विच का प्रावधान किया गया है। इस स्विच के प्रयोग से इंजन के एचओजी कनर्वटर के परीक्षण के लिए उसे रेक से जुड़े रहने की आवश्यकता नहीं होती। कहा कि रेलवे बोर्ड द्वारा पिछले वर्ष के 20 सर्वश्रेष्ठ काम में इसे भी शामिल किया गया है।
आज 35 बसों का संचालन