Prayagraj : शंकराचार्य-प्रशासन के बीच तीन घंटे तक चला मान-मनौव्वल का दौर, बैरियर तोड़ने वालों पर दर्ज होगा केस
मौनी अमावस्या के अवसर पर रविवार को संगम की रेती पर जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई।
विस्तार
मौनी अमावस्या के अवसर पर रविवार को संगम की रेती पर जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। यह विवाद करीब तीन घंटे तक चला, जिसके दौरान धक्का-मुक्की, बहस और मान-मनौव्वल के कई दौर हुए। घटना से स्नान के लिए आए श्रद्धालु दंग रह गए।
सुबह करीब नौ बजे तक व्यवस्था सामान्य थी। श्रद्धालु लगातार संगम स्नान कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ अचानक बढ़ने लगी। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, डीएम मनीष वर्मा, मेला अधिकारी ऋषिराज, पीएसी डीआईजी और शासन के गृह सचिव मौके पर मौजूद थे। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि बिना अनुमति नई परंपरा शुरू करने का प्रयास किया गया और समर्थकों ने कानून हाथ में लेने की कोशिश की।
पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बैरियर तोड़ने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। डीएम और मेला अधिकारी ने भी स्पष्ट किया कि पहले ही ऐसी किसी परंपरा से मना किया गया था। घटना के दौरान धक्का-मुक्की और अफरा तफरी देखकर संगम स्नान के लिए आए लाखों श्रद्धालु सहम गए। हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया और किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया।
बैरियर तोड़ कर आगे बढ़ने का आरोप
सुबह करीब 9.20 बजे वायरलेस पर सूचना प्रसारित हुई कि पांटून पुल नंबर दो की बैरिकेंडिंग तोड़ कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगभग 200 साधु-संतों के साथ संगम रथ से आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन का आरोप है कि परंपरा के विपरीत रथ से स्नान करने की कोशिश की गई।
कब क्या हुआ , घटनाक्रम
सुबह 9.45 बजे
शंकराचार्य के संगम बैरियर पर पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अधिकारियों ने भीड़ को देखते हुए रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन शिष्य नहीं माने। बहस के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
सुबह 10.11 बजे
अधिकारियों ने हाथ जोड़ कर समझाने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बनी। इसके बाद दस से अधिक शिष्यों को पुलिस ने रथ के पास से हटाकर एक कमरे में बैठा दिया। इससे शंकराचार्य और नाराज हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामने साधु-संतों के साथ मारपीट की जा रही है।
सुबह करीब 11 बजे
मंडलायुक्त ने शासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, लेकिन तत्काल कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर डॉ. अमित पाल शर्मा और बलिया से आए सीओ रजनीश यादव ने फिर समझाने की कोशिश की, पर शंकराचार्य ने इनकार कर दिया।
सुबह 11.50 बजे
शंकराचार्य शिष्यों को छुड़ाने पर अड़ गए। पुलिस कमिश्नर के हस्तक्षेप पर शिष्यों को छोड़ा गया, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई। कुछ देर बाद पुलिस ने शिष्यों को फिर से बैठा लिया।
दोपहर 12.05 बजे
मंडलायुक्त ने दोबारा शासन से बात की। दिशा-निर्देश मिलने के बाद सादे वेश में तैनात पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। स्नानार्थियों की तरह दिख रहे पुलिसकर्मियों ने रथ को धीरे-धीरे संगम तट से बाहर निकालकर शंकराचार्य के शिविर की ओर बढ़ाया। इस दौरान पीछे-पीछे पुलिस बल मुस्तैद रहा।
शंकराचार्य और पुलिस के बीच हंगामे पर प्रतिक्रिया
माघ मेले में किसी भी धार्मिक परंपरा की शुरुआत कदाचित उचित और शास्त्र सम्मत नहीं है। जिस आयोजन में संगम में करोड़ों लोग पुण्य स्नान करने के लिए एकत्र हैं, वहां पालकी या रथ ले जाकर अव्यवस्था पैदा करना सर्वथा अनुचित है।
-जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद, देवतीर्थ गोवर्धन पीठ
साधु-संत इस बार के माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में देख रहे हैं तो इसकी व्यवस्था में भी संतों और धर्माचार्यों को सहयोग देना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद हमारे पूज्य हैं पर उन्हें यह भी देखना चाहिए कि मेले में जिस समय लाखों की भीड़ है और पुलिस उसकी सुरक्षा में तत्पर है तब ऐसा कुछ न किया जाए जिससे व्यवस्था बिगड़े। - महंत रविंद्र पुरी, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद