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गंगा के कछार में बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज

Tue, 24 Sep 2019 01:24 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 01:24 AM IST
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praposal of bandh rrejected by the  irregation department
praposal of bandh rrejected by the irregation department - फोटो : CITY DESK
अनूप ओझा
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प्रयागराज। गंगा के फ्लड जोन में बसी पांच लाख से अधिक की आबादी को बाढ़ की आपदा से बचाने के लिए तैयार किया गया बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। ऐसे में नदी की तलहटी में तेजी से विस्तार ले रही आबादी को आने वाले समय में बाढ़ के दौरान विस्थापन की समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती। तटवर्ती बस्तियों, कॉलोनियों में बाढ़ रोकने के लिए बांध निर्माण का प्रस्ताव सिंचाई विभाग ने शासन को भेजा था। केंद्रीय जल आयोग और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के विशेषज्ञों की कमेटी की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में इसकी उपयोगिता को रद्द करते हुए प्रस्ताव को अव्यवहारिक करार दे दिया गया है। ऐसे में अब वहां बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बांध निर्माण नहीं कराया जा सकेगा।
गंगा-यमुना में आई बाढ़ से दो दर्जन से अधिक बस्तियों, कॉलोनियों और छिटफुट हजारों भवनों के जलमग्न होने के बाद एक बार फिर वहां बांध निर्माण को लेकर आवाज उठाई जा रही थी। इसके बाद सिंचाई बाढ़ खंड विंध्याचल मंडल केमुख्य अभियंता डीके मिश्रा ने अभियंताओं की टीम के साथ गंगा किनारे के बाढ़ग्रस्त इलाकों का सर्वेक्षण कर स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद अभियंताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया कि वर्ष 2013 व 2016 की बाढ़ के बाद से ही वहां प्रभावित बस्तियों को बचाने के लिए बांध निर्माण की वकालत शुरू कर दी गई थी।
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कुछ जन प्रतिनिधियों ने भी विधान सभा में वहां बाढ़ की समस्या से निबटने के लिए बांध निर्माण कराने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से फाफामऊ से शिवकुटी-संगम के बीच बांध निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा तो गया, लेकिन जब इसकी उपयोगिता को लेकर सर्वेक्षण कराया गया तो रिपोर्ट विपरीत आ गई। केंद्रीय जल आयोग और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग की संयुक्त टीमों ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि वहां बांध का निर्माण कराया ही नहीं जा सकता। बांध हमेशा नदी तट से निर्धारित की गई एक दूरी पर कराया जाता है न कि नदी तट के भीतर। फाफामऊ से संगम के बीच गंगा किनारे लोग गंगा की तलहटी के फ्लड जोन में ही बसे हैं। ऐसे में अगर वहां बांध का निर्माण करा भी दिया जाए तो गंगा आसपास से नया किनारा निर्धारित कर अपने बहाव की दूसरी दिशा तय कर सकती है। ऐसे में उस बस्ती के लिए और भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
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प्रयागराज में गंगा किनारे बाढ़ग्रस्त होने वाली बड़ी आबादी के लिए बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग और केंद्रीय जल आयोग की कमेटी अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट में वहां बांध की उपयोगिता को खारिज कर चुकी है। नदी तट के भीतर बांध निर्माण संभव नहीं है। डीके मिश्रा, मुख्य अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड, विंध्याचल मंडल।

गंगा के फ्लड जोन में बने सभी मकान दो या तीन मंजिला
प्रयागराज। सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों ने गंगा की तलहटी में घर बनाने वालों पर तल्ख टिप्पणी भी की है। उनका कहना है कि फाफामऊ कछार, बेली कछार, नेवादा, नागवासुकि मंदिर से बघाड़ा, सलोरी, शिवकुटी, शंकरघाट, रसूलाबाद, मेहदौरी, गंगानगर राजापुर तक गंगा के फ्लड जोन में जितने भी मकान बने हैं, सभी दो या तीन मंजिला ही निर्मित कराए गए हैं। अभियंताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया है कि बाढ़ के दौरान वो लोग पहली या दूसरी मंजिल पर शिफ्ट हो जाएंगे और हफ्ते-पखवारे भर के बाद बाढ़ का पानी खिसकने पर वह फिर अपने घरों में आ आएंगे।
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