प्रयागराज में तीन दौरों में तमाम लोगों को अपना बना गए थे प्रणब दा
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भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जाना संगमनगरी को भी आहत कर गया है। हालांकि यहां वह सिर्फ तीन बार ही आए, पहली बार बतौर केंद्रीय मंत्री जबकि बतौर राष्ट्रपति भी दो बार उनका आना हुआ। लेकिन इन दौरों में वह अपनी विशिष्ट छवि से सभी को अपना बना गए। संगमनगरी ने भी आत्मीयता के साथ उनका स्वागत, सम्मान किया। बांग्ला समाज और कांग्रेसियों के अतिरिक्त अनेक संस्थाओं, दलों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।
बतौर राष्ट्रपति पहली बार वह 25 दिसंबर 2012 को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। इसके बाद तीसरी और अंतिम बार वह 25 दिसंबर 2013 में प्रयाग संगीत समिति में आयोजित निखिल भारत बंग सहित्य सम्मलेन में शामिल होने आए थे।
संस्था के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसमें संस्था के तकरीबन 1400 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस मौकेपर उन्होंने नई पीढ़ी को मातृभाषा बांग्ला से जोड़ने की अपील करते हुए युवाओं को राष्ट्र की धरोहर की संज्ञा दी थी। यहां से जगत तारन गर्ल्स इंटर कॉलेज जाकर उन्होंने वहां बाबू चिंतामणि घोष की प्रतिमा का अनावरण किया था।
इससे पहले वह विधान सभा चुनाव के दौरान इलाहाबाद उत्तरी से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेता अनुग्रह नारायण सिंह के समर्थन में 13 फरवरी 2012 को चुनाव प्रचार के लिए आए थे। वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एजी ऑफिस के सामने आयोजित कर्मचारियों की सभा को संबोधित किया था। मंच पर सिर्फ पांच कुर्सियां रखी गई थीं लेकिन कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला के साथ जुटे तमाम कांग्रेसियों के कारण मंच पर भीड़ जुट गई थी।