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प्राण प्रतिष्ठा, चक्षुदान से जागीं नवदुर्गा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:26 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शारदीय नवरात्र के तहत विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में ढाक की मंगलध्वनि के बीच भगवती दुर्गा की पूजा-आराधना की धूम रही। बुधवार को महासप्तमी पर देवी की विशिष्ट आराधना की गई। पुष्पांजलि स्वरूप महिलाओं ने नारियल अर्पित किया।
बांग्ला पंरपरा के अनुसार केला सहित नौ प्रकार के पौधों को एक साथ जोड़कर नवदुर्गा की प्रतीक तैयार की गई। इसमें धान, कोचू मान, अशोक, अनार, हल्दी, अपराजिता, बेल तथा जयंती की डालियां और पत्ते शामिल रहे। फिर जोड़ा बेल लगाकर केले को पौधे को नारी का रूप दिया गया। भोर में ‘नवपत्रिका’ को स्नान कराने के बाद वस्त्र, आभूषण पहनाए गए। ‘उषा आरती’ के बाद प्राण प्रतिष्ठा, चक्षुदान के अनुष्ठान हुए।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दर्पण में मां के बिंब को स्नान कराके बीजमंत्र लिखा गया। पूजन के बाद नवपत्रिका स्वरूप को पहले घट और फिर फिर घट से देवी के हृदय में प्राणप्रतिष्ठा की गई। महासप्तमी की पूजा के बाद पंडालों में रौनक आ गई। ढाक की थाप पर शाम को महासप्तमी की विशिष्ट आरती हुई। लूकरगंज बारवारी, कर्नलगंज बारवारी, दरभंगा, साउथ मलाका, जार्जटाउन बारवारी, जीटीबी नगर, शास्त्रीनगर दुर्गा पूजा कमेटी, करेलाबाग बारवारी, बैरहना, नेता नगर, बाई का बाग, अशोक नगर, कालिंदीपुरम, प्रीतमनगर, सुलेमसराय, कटरा, शाहगंज आदि पूजा पंडालों में देवी की महाआरती में मौजूदगी दर्ज कराई।
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देवी के मनोहारी स्वरूपों और आकर्षक पंडालों को देखने के लिए देर रात तक तांता लगा रहा। पंडालों के करीब मेले लगे जहां खाने-पीने की तमाम चीजों के स्टाल तो थे ही, बच्चों और बड़ों के लिए भी कई तरह के मनोरजंक कार्यक्रम रहे। परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने पंडाल और प्रतिमा देखने के साथ ही पार्क के मेले का भी आनंद लिया।
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बांग्ला पंरपरा के अनुसार केला सहित नौ प्रकार के पौधों को एक साथ जोड़कर नवदुर्गा की प्रतीक तैयार की गई। इसमें धान, कोचू मान, अशोक, अनार, हल्दी, अपराजिता, बेल तथा जयंती की डालियां और पत्ते शामिल रहे। फिर जोड़ा बेल लगाकर केले को पौधे को नारी का रूप दिया गया। भोर में ‘नवपत्रिका’ को स्नान कराने के बाद वस्त्र, आभूषण पहनाए गए। ‘उषा आरती’ के बाद प्राण प्रतिष्ठा, चक्षुदान के अनुष्ठान हुए।
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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दर्पण में मां के बिंब को स्नान कराके बीजमंत्र लिखा गया। पूजन के बाद नवपत्रिका स्वरूप को पहले घट और फिर फिर घट से देवी के हृदय में प्राणप्रतिष्ठा की गई। महासप्तमी की पूजा के बाद पंडालों में रौनक आ गई। ढाक की थाप पर शाम को महासप्तमी की विशिष्ट आरती हुई। लूकरगंज बारवारी, कर्नलगंज बारवारी, दरभंगा, साउथ मलाका, जार्जटाउन बारवारी, जीटीबी नगर, शास्त्रीनगर दुर्गा पूजा कमेटी, करेलाबाग बारवारी, बैरहना, नेता नगर, बाई का बाग, अशोक नगर, कालिंदीपुरम, प्रीतमनगर, सुलेमसराय, कटरा, शाहगंज आदि पूजा पंडालों में देवी की महाआरती में मौजूदगी दर्ज कराई।
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देवी के मनोहारी स्वरूपों और आकर्षक पंडालों को देखने के लिए देर रात तक तांता लगा रहा। पंडालों के करीब मेले लगे जहां खाने-पीने की तमाम चीजों के स्टाल तो थे ही, बच्चों और बड़ों के लिए भी कई तरह के मनोरजंक कार्यक्रम रहे। परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने पंडाल और प्रतिमा देखने के साथ ही पार्क के मेले का भी आनंद लिया।