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प्रयागराज : एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर के बेटे की हत्या में नामजद था प्रधान माशूकउद्दीन

Sat, 04 Mar 2023 06:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 04 Mar 2023 06:51 AM IST
सार

पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के जिस असरौली गांव के प्रधान माशूकउद्दीन का घर शुक्रवार को जमींदोज किया गया, वह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर राम नवमी यादव के बेटे बलवंत यादव की हत्या में नामजद हुआ था।

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Pradhan Mashuquddin was named in the murder of the son of encounter specialist inspector
Prayagraj News : घर तोड़ने का विरोध करते माशूकउद्दीन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र के जिस असरौली गांव के प्रधान माशूकउद्दीन का घर शुक्रवार को जमींदोज किया गया, वह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर राम नवमी यादव के बेटे बलवंत यादव की हत्या में नामजद हुआ था। हालांकि, न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया था लेकिन इस घटना के बाद क्षेत्र में ऐसा दबदबा बना कि आज तक उसके खिलाफ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं होती। अकेले माशूकउद्दीन पर ही 16 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। उसके परिवार के दस पुरुषों में नौ के खिलाफ अलग अलग थानों 52 मुकदमे चल रहे हैं।

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असरौली गांव के माशूकउद्दीन की अपराध कथा आज से 47 साल पहले 1975 से शुरू हुई थी। उसने अपने सगे भाई मोहिनुद्दीन के साथ मिलकर असरौली के हाजी उर्फ सनुद्दीन को गोली मार दी थी। हाजी को अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस घटना के पांच दिन बाद माशूकउद्दीन ने अपने भाइयों तथा अन्य साथियों कयूम, महबूब और इदरीस के साथ मिलकर हाजी के साथी सफीकुद्दीन को असरौली में मस्जिद से खींचकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसी दिन अस्पताल में भर्ती हाजी की भी मौत हो गई थी। दिन दहाड़े पांच दिन में दो मौतों से इलाका दहल गया था।

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तत्कालीन इंस्पेक्टर धूमनगंज राम नवमी यादव एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाते थे। उन्हें माशूक के गिरोह को खत्म करने की कमान सौंपी गई। इंस्पेक्टर राम नवमी यादव ने माशूकउद्दीन के भाई मोहिउद्दीन को मुठभेड़ में मार गिराया, लेकिन माशूकउद्दीन बच गया था। इस घटना के बाद माशूकउद्दीन ने 20 साल तक राम नवमी यादव के रिटायर होने की इंतजार किया। 1995 में सेवानिवृत इंस्पेक्टर राम नवमी यादव के बेटे बलवंत यादव की इंडियन ऑयल डिपो झलवा के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में माशूकउद्दीन और भतीजे असलूब को नामजद कराया गया था। हालांकि, बाद में न्यायालय दोनों दोषमुक्त हो गए थे।

रिटायर्ड इंस्पेक्टर के बेटे की हत्या के बाद जब वे नामजद हुए तो क्षेत्र में उनका बड़ा दबदबा हो गया। इसी बीच माशूकउद्दीन अतीक के भी संपर्क में आ गया। अतीक उस समय ऐसे ही लोगों को तलाश कर गिरोह में शामिल कर रहा था, जिसका क्षेत्र में आतंक हो।

माशूक और परिवार वालों पर दर्ज मुकदमे
1-माशूकउद्दीन :                        16 मुकदमे
2-शाहजमन (माशूक का बेटा) : 11 मुकदमे
3-असलूब (माशूक का भतीजा) : 10 मुकदमे
4-शाह फाहेद (माशूक का बेटा) : पांच मुकदमे
5-शाह फैसल (माशूक का बेटा) : दो मुकदमे
6-शाह सऊद (माशूक का बेटा) : पांच मुकदमे
7-सऊद फैसल (माशूक का बेटा : एक मुकदमा
8-शाह खालिद (माशूक का बेटा) : एक मुकदमा
9-शाह औरंगजेब (माशूक का बेटा) एक मुकदमा
10-शाहनवाज ( माशूक का बेटा) : मुकदमा नहीं

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