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एसआरएन अस्पताल में बिजली बनी खलनायक
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फाइल फोटो
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मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में बिजली का गुल होना मरीजों की लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी है। खलनायक बनी बिजली के लोकल फाल्ट को दुरुस्त करने को न संसाधन हैं और न ही इलेक्ट्रीशियन। कभी मरम्मत तो कभी लोकल फाल्ट के नाम पर गुल बिजली गर्मी में बड़ी दिक्कत बनी है। इस संबंध में प्राचार्य के आदेश का मातहत अनुपालन भी नहीं कर रहे हैं।
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एसआरएन अस्पताल में एक हजार बेड हैं। यहां औसतन करीब 4000 मरीज रोज आते हैं। इनमें 40 से 60 मरीज गंभीर हालत में भर्ती किए जाते हैं। ओपीडी में भीड़ और मरीजों से फुल वार्डों की दशा तो सुधरी लेकिन बिजली का गुल होना पहले जैसा ही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी लोकल फाल्ट के नाम पर बिजली कटौती गर्मी के मौसम में कष्टकारी बनी है। मंगलवार को भी बिजली की आवाजाही परेशानी का कारण बनी रही।
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अस्पताल के कुल 11 वार्डों और आईसीयू
में भर्ती सैकड़ों मरीज बिना बिजली तड़पते हैं। जनरेटर सिर्फ उसी समय चलाया जाता है, जब ऑपरेशन होते हैं। 150 से अधिक डॉक्टरों और करीब इतनी ही स्टाफ नर्सें तो हैं, लेकिन तीमारदारों को स्ट्रेचर और व्हील चेयर नहीं मिल पाती। बताते हैं कि वार्ड ब्वाय समेत अन्य कर्मचारियों की मनमानी मरीजों और तीमारदारों पर भारी पड़ रही है।
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कुंभ से पहले अस्पताल को सुविधा संपन्न बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद बिजली के लोकल फाल्ट ठीक करने के लिए कोई मिस्त्री की व्यवस्था नहीं की गई। फिलहाल इस समय वीआईपी के नजदीकी रिश्तेदार के आईसीयू में भर्ती होने से वहां की व्यवस्था ठीक दिख रही है।
सात साल बाद इलेक्ट्रीशियन की हुई तैनाती
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में सात साल बाद इलेक्ट्रीशियन की तैनाती की गई है। वह भी चिल्ड्रेन अस्पताल से बुलाया गया है। अब चिल्ड्रेन में तैनात इलेक्ट्रीशियन दोनों अस्पतालों में बिजली संबंधी कार्यों की देखरेख करेगा। इस संबंध में 21 दिसंबर को प्रधानाचार्य डॉ. एसपी सिंह ने निर्देश दिए थे। जिसका अनुपालन एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव मंगलवार को करा सके। 23 अप्रैल को जारी पत्र में उन्होंने चिल्ड्रेन अस्पताल में तैनात इलेक्ट्रीशियन हेमंत कुमार सिन्हा को एसआरएन में भी बिजली का काम देखने के लिए आदेश जारी किया।