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फर्जी मैट्रिमोनियल साइट चलाने के मामले में पुलिस ने कसा शिकंजा, फर्जीवाड़े में शामिल कई और साइट की छानबीन में जुटी पुलिस

Mon, 07 Dec 2020 01:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 07 Dec 2020 01:20 PM IST
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Police investigating several more sites involved in screws, forgery and police in connection with running fake matrimonial site
धोखाधड़ी - फोटो : pixabay
प्रयागराज में फर्जी मैट्रिमोनियल साइट के गिरोह का भंडाफोड़ करने के बाद पुलिस ने इस धंधे में लेग और साइट्स की खोजबीन में जुट गई है। पता चला है कि प्रयागराज सहित आसपास के कई जनपदों में इस तरह की जालसाजी को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस गोपनीय तरीके से इनकी छानबीन में जुट गई है। शहर में और कई फर्जी वैवाहिक विज्ञापन के नाम पर फर्जीवाड़े की सूचना मिली है। 
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रविवार को पुलिस ने प्रयागराज के सिविल लाइंस में फर्जी मैट्रिमोनियल साइट चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इससे इससे गिरोह से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। लोगों को गुमराह करने के लिए आफिस में काम करने के लिए महिलाओं को रखा गया था जो आसानी से लोगों को अपने झांसे में लेकर रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे मोटी रकम की वसूली करती थीं।
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रजिस्ट्रेशन कराने वालों को खूबसूरत मॉडल्स और दूसरी लड़की-लड़कों की फोटों उनके व्हाट्सएप पर भेजी जाती थी। साथ ही उनका नंबर भी दिया जाता था। जब लोग लड़का-लड़की के नंबर पर फोन करते थे तो या तो नंबर बंद मिलता था या फोन उठने पर वह शादी से इनकार कर देते थे और इस तरह की किसी भी जानकारी से अनभिज्ञ होते थे। 
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प्रयागराज में यह जालसाजी दो सालों से चल रही थी। कई लोग इनके झांसे में आकर पैसा गंवा चुके थे। इसकी शिकायत पुलिस तक पहुंची तो स्टिंग आपरेशन की योजना बनाई गई। कुछ दिन पहले एडीजी प्रेम प्रकाश को लखनऊ के दिनेश कुमार ने इस फर्जी साइट के बारे में जानकारी दी और बताया कि  सिविल लाइंस में इसका दफ्तर है। एडीजी के निर्देश पर पुलिस ने फर्जी साइट संचालकों को पकड़ने के लिए स्टिंग ऑपरेशन की योजना बनाई। मामले का पता लगाने के लिए महिला थाने की कांस्टेबिल अनीता कस्टमर बनीं तो एसओ दीपा सिंह उसकी मां बनकर बिग बाजार के पास मैट्रिमोनियल साइट के दफ्तर पहुंचीं।

पहले उनसे छह से 12 हजार रुपये के रजिस्ट्रेशन के लिए कहा गया। बताया गया कि छह हजार रुपये देने वालों को छह महीने और 12 हजार देने वालों को एक साल का सब्सक्रिप्शन मिलता है यानी कि एक साल तक मैट्रिमोनियल साइट पर रजिस्टर कराने वाले लड़के या लड़कियों की फोटो और बायोडेटा फोन नंबर समेत उपलब्ध करा दिए जाते हैं। महिला कांस्टेबल ने रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराया तो उन्हें तमाम फोटो और बायोडाटा भेज दिए गए। बाद में जब महिला एसओ दीपा सिंह ने बायोडेटा में दिए नंबरों को चेक किया तो सभी फर्जी निकले। इसके बाद तुरंत फोर्स को बुला लिया गया। 

दो सालों से चलता रहा था फर्जीवाड़ा 

अब तक की जांच से पता चला है कि मैट्रिमोनियल साइट पर जाने के बाद के बाद लड़की या लड़के को तमाम फोटोग्राफ और बायोडेटा दे दिया जाता था। रजिस्ट्रेशन के बाद जो नंबर उपलब्ध कराए जाते वह या तो फर्जी होते या फिर नंबर दफ्तर में काम करने वाली लड़कियों या लड़कों के होते। बात करने पर वे शादी के लिए साफ मना कर देते थे। तमाम नंबर गलत होते या फिर बंद मिलते थे। यह फ्राड दो सालों से चल रहा था। लखनऊ के रहने वाले दिनेश कुमार ने जब एडीजी से शिकायत की तो पूरे मामले का पता चला। 
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