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गजब : पुलिस 30 साल में भी नहीं जुटा सकी अमानत में खयानत के सुबूत, आरोपी बरी

Sun, 03 Sep 2023 03:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Sep 2023 03:13 PM IST
सार

विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने यह फैसला दिया। यह प्रकरण वर्ष 1992 में दारागंज थाने में दर्ज हुआ था। इसमें पूरा पड़ाइन निवासी लालता प्रसाद ने आरोप लगाया था कि जसरा निवासी बृजलाल उससे रिक्शा किराये पर ले गया था, लेकिन उसे लौटाया नहीं।

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Police could not gather evidence of betrayal in trust even in 30 years, accused acquitted
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

किराए पर लिया एक रिक्शा नहीं लौटाने का मुकदमा अदालत में 30 साल तक खिंचा। इन तीन दशकों में आरोपी के खिलाफ पुलिस एक भी ठोस सुबूत नहीं जुटा पाई। हैरान करने वाली बात यह भी रही कि अभियोजन पक्ष मुकदमा दर्ज कराने वाले मुद्दई की गवाही तक नहीं करा पाया। जिला न्यायालय ने अमानत में खयानत के आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

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विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने यह फैसला दिया। यह प्रकरण वर्ष 1992 में दारागंज थाने में दर्ज हुआ था। इसमें पूरा पड़ाइन निवासी लालता प्रसाद ने आरोप लगाया था कि जसरा निवासी बृजलाल उससे रिक्शा किराये पर ले गया था, लेकिन उसे लौटाया नहीं। पुलिस ने लालता प्रसाद की तहरीर पर अमानत में खयानत की धारा में दर्ज कर विवेचना की और कोर्ट में बृजलाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

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बृजलाल की जब अदालत में पेशी हुई तो आरोपी ने खुद को बेगुनाह बताया। अदालत ने अभियोजन पक्ष को साक्ष्य पेश करने का आदेश दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष को बरसों दिए, लेकिन आराेपी के खिलाफ कोई सुबूत पेश नहीं किया जा सका। चौंकाने वाली बात यह भी रही कि अभियोजन मामले के मुद्दई लालता प्रसाद की गवाही करवाने में असफल रहा।

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लंबित मामले की सुनवाई शुक्रवार को शुरू हुई ताे कोर्ट ने पाया कि 30 साल तक कई मौके दिए जाने के बावजूद अभियोजन की ओर से कोई भी गवाह पेश नहीं किया जा सका। वर्ष 1992 का यह मामला प्राचीनतम वादों में से एक है। अंतत: कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में आरोपी बृजलाल को बरी कर दिया।

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