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पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018: हाईकोर्ट दे सकता है दोबारा मेडिकल जांच का आदेश 

Tue, 09 Jun 2020 07:50 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 09 Jun 2020 07:50 PM IST
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Police Constable Recruitment 2018: High Court can order medical examination again
Police Bharti

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पुलिस भर्ती बोर्ड अभ्यर्थी की शिकायत पर उसका पुन: मेडिकल टेस्ट नहीं करवाता है तो कोर्ट को अधिकार है कि वह दोबारा मेडिकल जांच का आदेश दे सकता है।

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कोर्ट ने कहा कि पुलिस भर्ती नियमावली में यह प्रावधान है कि शारीरिक मानक सत्यापन टेस्ट से असंतुष्ट अभ्यर्थी यदि उसी दिन आपत्ति करता है तो बोर्ड अपर पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में डाक्टरों के पैनल से दोबारा टेस्ट कराएगा। ऐसा नहीं करने पर अभ्यर्थी को कोर्ट से आदेश प्राप्त करने का अधिकार है। प्रदेश सरकार ने दोबारा मेडिकल कराने का आदेश देने की हाईकोर्ट की अधिकारिता पर आपत्ति उठाते हुए कहा था कि अदालत को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। इस आपत्ति को खारिज कर दिया गया।   
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यह आदेश न्यायमूर्ति आरएन तिलहरी ने जितेन्द्र कुमार सिंह व सात अन्य की याचिका पर दिया है। याचीगण ने पुलिस मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट से दोबारा जांच कराने का आदेश देने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने सीएमओ गोरखपुर को याचीगण का दोबारा शारीरिक मानक परीक्षण करने का निर्देश दिया था। सीएमओ की रिपोर्ट आने पर अदालत ने पुलिस भर्ती बोर्ड को उन्हें दोबारा मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाने का आदेश दिया है।

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Police Constable Recruitment 2018: High Court can order medical examination again
police - फोटो : Demo Pic
याचीगण पुलिस भर्ती 2018 में लिखित परीक्षा में सफल हुए और शारीरिक मानक सत्यापन परीक्षा हुई, जिसमें उनकी लंबाई 168 सेंटीमीटर से कम होने के कारण अनफिट कर दिया गया।

उन्होंने टेस्ट पर आपत्ति करते हुए दोबारा जांच की मांग की, किंतु भर्ती बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया। तो हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर सीएमओ , मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर की टीम ने अपर पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में जांच की। सीएमओ की रिपोर्ट में कहा गया कि एक को छोड़कर ,जो टेस्ट के लिए आया ही नहीं, शेष सात की लंबाई 168 सेमी या अधिक है। इस रिपोर्ट को बोर्ड ने कहीं चुनौती भी नहीं दी है। 

सरकार का कहना था कि बोर्ड द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड को जांच का अधिकार है। उसकी राय अंतिम है। हाईकोर्ट को दोबारा जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और याचियों को चयन प्रक्रिया की अगली स्टेज की शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। यह प्रक्रिया छह माह में पूरी करने का भी निर्देश दिया है।
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