हाईकोर्ट : फर्जी चेक से भुगतान मामले में पीएनबी अधिकारी की अग्रिम जमानत मंजूर
तत्कालीन बैंक प्रबंधक ने वर्ष 2010 में चेक से फर्जी भुगतान के संदर्भ में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर के मुताबिक फतेहपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के एकाउंट से फर्जी तरीके से पैसा नामजद आरोपियों द्वारा कानपुर ब्रांच से निकाला गया था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के फर्जी चेक से भुगतान मामले में पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। बैंक अधिकारी का नाम आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद प्रकाश में आया था। यह आदेश न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव ने याची निर्मल कुमार की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुन कर दिया। मामला कानपुर जिले के पंजाब नेशनल बैंक को शाखा घाटमपुर का हैं।
तत्कालीन बैंक प्रबंधक ने वर्ष 2010 में चेक से फर्जी भुगतान के संदर्भ में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर के मुताबिक फतेहपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के एकाउंट से फर्जी तरीके से पैसा नामजद आरोपियों द्वारा कानपुर ब्रांच से निकाला गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों की गिरफ्तारी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
याची के अधिवक्ता ने बताया कि याची वर्तमान समय में मिर्जापुर जिले के अहरौरा शाखा में कार्यरत है। घटना के समय वह फतेहपुर में लिपिक के पद पर कार्यरत था। याची एफआईआर में नामजद नही था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि फतेहपुर जिलापंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह व बैंक आफिसर के हस्ताक्षर से जारी चेक का भुगतान कानपुर में होने के बाद पता चला था कि चेक फर्जी था।
अपर शासकीय अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खाते से रेखा सिंह के पद से हटने के बाद भी उनके हस्ताक्षर को कंप्यूटर में डिलीट नही किया गया जिसकी वजह से गलत तरीके से भुगतान हो गया।
याची के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि कार्य बैंक सर्कुलर के अनुसार किसी का हस्ताक्षर हटाना व जोड़ना लिपिक का कार्य नही है। इसलिए याची निर्दोष है। हाइकोर्ट ने बैंक अधिकारी निर्मल कुमार की सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।