High Court : दुष्कर्म मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने की वैधता की चुनौती याचिका खारिज
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने धीरज जिंदल की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका का सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता डिप्टी सालिसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने प्रतिवाद किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपितों के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर पीडि़ता की प्रोटेस्ट अर्जी खारिज करने की वैधता की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा मेडिकल व फारेंसिक जांच रिपोर्ट घटना की पुष्टि नहीं करते। पीड़िता के निजी अंगों में कोई चोट नहीं पाई गई। उसने कैंची या चाकू से अपने कपड़े स्वयं फाड़े। जांच में पीडि़ता पर जहर के असर के सबूत नहीं मिले। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं।
आरोपियों की लोकेशन घटना के समय अलीगढ़ में न होकर दूसरी जगह पाई गई। ऐसे में सीबीआई अदालत गाजियाबाद द्वारा केस चलाने से इंकार कर और पुनरीक्षण अदालत ने अर्जी खारिज कर कोई वैधानिक गलती नहीं की है। कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप में सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट निरस्त कर समन जारी कर ट्रायल करने की मांग को लेकर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने धीरज जिंदल की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका का सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता डिप्टी सालिसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने प्रतिवाद किया। याची ने अपनी बहन के साथ गोपाल गुप्ता व पंकज गुप्ता पर दुष्कर्म करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप लगाया कि उसकी बहन जजेज कंपाउंड अलीगढ़ में आरोपियों ने अकेली रह रही थी।
आरोपियों ने छत के रास्ते बहन के घर में घुसकर हिट छिडक़ कर बेहोशी हालत में उससे दुष्कर्म किया और भाग गये। पड़ोसियों ने पीडि़ता को अस्पताल में भर्ती कराया। आरोपियों की याचिका पर गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने पारिवारिक विवाद के चलते फर्जी केस दर्ज करने पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। जिसे स्वीकार करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।