Prayagraj : पार्श्व गायक रवि जैन पहुंचे प्रयागराज, एक गीत को 22 भाषाओं में गाने पर मिली पहचान
मैं भारत हूं, मैं भारत हूं, मैं भारत हूं... यह देश अपना भारत तो इंडिया फिर क्यों बोलें...। इस गीत को हिंदी, मराठी, तेलुगु, अंग्रेजी समेत 22 भाषाओं में गाने वाले जाने माने पार्श्व गायक और संगीतकार रवि जैन एक कार्यक्रम के सिलसिले में शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे।
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मैं भारत हूं, मैं भारत हूं, मैं भारत हूं... यह देश अपना भारत तो इंडिया फिर क्यों बोलें...। इस गीत को हिंदी, मराठी, तेलुगु, अंग्रेजी समेत 22 भाषाओं में गाने वाले जाने माने पार्श्व गायक और संगीतकार रवि जैन एक कार्यक्रम के सिलसिले में शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने संगम में डुबकी भी लगाई। सिविल लाइंस में अशोक जैन के आवास पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए रवि जैन ने कहा कि वह इस गीत के माध्यम से कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इंडिया नाम अंग्रेजों ने दिया है। भारत पौराणिक नाम है जिसके बारे में युवा पीढ़ी को बताने के लिए उन्होंने न सिर्फ इस गीत को 22 भाषाओं में लिखा बल्कि 22 भाषाओं में संगीतबद्ध करके अपनी आवाज भी दी है। इसके लिए मुंबई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं।
दर्जन भर हिंदी और भोजपुरी फिल्मों के लिए गीत लिख चुके और गा चुके रवि जैन इन दिनों बोलो राधे-राधे फिल्म के लिए गीत लिखने में व्यस्त हैं। यह फिल्म लोगों में सनातन संस्कृति को जागृत करने का प्रयास करेगी और गो माता के प्रति लोगों में आस्था और विश्वास पैदा करने के लिए प्रेरित करेगी। इस फिल्म के कई गीत अभी से ही वायरल हो रहे हैं।
जैन के अनुसार, बचपन में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के सिलिगुड़ी से संगीत की यात्रा प्रारंभ हुई। 1988 में दिल्ली से फाइटर पायलट की पढ़ाई के दौरान किसी के माध्यम से जाने माने गीतकार और गायक रवींद्र जैन से परिचय हुआ और उन्होंने मुंबई बुला लिया। मेरा गीत सुनने के बाद वह मेरी आवाज से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे अपना शिष्य बना लिया।
रवींद्र जैन के बारे में सिर्फ सुनते आ रहे थे लेकिन मुलाकात का सपना पूरा हुआ और उनका शिष्य बनकर उनके साथ देश भर में कार्यक्रमों में प्रस्तुति देनी शुरू कर दी। साथ में फाइटर पायलट की पढ़ाई भी जारी रखी। कहा कि रवींद्र जैन से मुलाकात के बाद उनके जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल गई, नहीं तो आज वह फाइटर पायलट होते।
संस्कारों से मिलती है संगीत की शिक्षा
रवि जैन ने बताया कि बचपन में माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों के चलते वह आज संगीत की दुनिया में सफल हो सके हैं। बचपन में माता-पिता भक्ति भावना में लीन रहते थे। उनके साथ आरती में शामिल होने और भक्ति गीत गाते हुए मन में संगीत के प्रति रुचि बढ़ी। इसके बाद हिंदी फिल्म हीरा और पन्ना देखने के बाद जीवन बदल गया। मानों संगीत का वायरस शरीर में प्रवेश कर गया, फिर पूरा जीवन संगीत की साधना में बिताने का संकल्प ले लिया। कहा कि वह अपने गुरु रवींद्र जैन से प्रेरित होकर काला चश्मा लगाते हैं। यह उनके प्रति श्रद्धांजलि का भाव प्रकट करता है। संगीत के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं से उन्होंने कहा कि हिम्मत न हारें, अपनी साधना जारी रखें तभी मंजिल मिलेगी।
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