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20 हजार से कम काउंट तभी मिलेगी प्लेटलेट्स
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Platelets will get less than 20 thousand count only
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प्रयागराज। डेंगू का डंक इस कदर परेशान कर रहा है कि पीड़ितों को इलाज कराने में मुश्किल हो रही है। प्लेटलेट्स की कमी से दहशत में आए मरीजों के तीमारदार ब्लड बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। ब्लड बैंकों में 20 हजार से कम काउंट वाले मरीजों को ही मुश्किल से प्लेटलेट्स मिल पा रही हैं।
शहर में एसआरएन, बेली और एएमए ब्लड बैंक में इन दिनों प्लेटलेट्स के लिए मारामारी मची है। 15 दिन पहले तक बिना डोनर या ब्लड डोनेट किए प्लेटलेट्स मिल जाती थीं, लेकिन अब रक्तदान के बाद भी मुश्किल से एक से दो यूनिट प्लेटलेट्स मिल पा रही हैं।
नैनी निवासी दशरथ सिंह इस वक्त डेंगू से पीड़ित हैं। प्लेटलेट्स घटीं और काउंट 30 हजार आया तो डॉक्टर ने प्लेटलेट्स लाने को कहा। उनके तीमारदार बुधवार से दो यूनिट प्लेटलेट्स के लिए परेशान घूम रहे हैं। वहीं कीडगंज के खुशहाल निषाद के परिवारीजन दो दिन से प्लेटलेट्स के लिए भटक रहे हैं। एक से दूसरे ब्लड बैंक आने-जाने में समय खराब हो रहा है, लेकिन प्लेटलेट्स नहीं मिल रही हैं। बेली ब्लड बैंक में शुक्रवार सुबह नंबर लगाने पर रात आठ बजे उन्हें दो यूनिट प्लेटलेट्स मिल सकी।
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ये दो मामले तो बानगी भर हैं। सच्चाई तो यह है कि शहर में डेंगू मरीजों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कई गुना ज्यादा है। सीएमओ दफ्तर से बताई जा रही मरीजों की संख्या भले ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच के बाद पुख्ता मान ली जाए, लेकिन प्लेटलेट्स के लिए परेशान लोगों को देखकर डेंगू की भयावहता का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। अब हाल यह है कि मरीज के तीमारदार डोनर लाते हैं, रक्तदान कराते है, फिर चार से छह घंटे बाद उन्हें प्लेटलेट्स मिल पा रही हैं।
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शहर में एसआरएन, बेली और एएमए ब्लड बैंक में इन दिनों प्लेटलेट्स के लिए मारामारी मची है। 15 दिन पहले तक बिना डोनर या ब्लड डोनेट किए प्लेटलेट्स मिल जाती थीं, लेकिन अब रक्तदान के बाद भी मुश्किल से एक से दो यूनिट प्लेटलेट्स मिल पा रही हैं।
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नैनी निवासी दशरथ सिंह इस वक्त डेंगू से पीड़ित हैं। प्लेटलेट्स घटीं और काउंट 30 हजार आया तो डॉक्टर ने प्लेटलेट्स लाने को कहा। उनके तीमारदार बुधवार से दो यूनिट प्लेटलेट्स के लिए परेशान घूम रहे हैं। वहीं कीडगंज के खुशहाल निषाद के परिवारीजन दो दिन से प्लेटलेट्स के लिए भटक रहे हैं। एक से दूसरे ब्लड बैंक आने-जाने में समय खराब हो रहा है, लेकिन प्लेटलेट्स नहीं मिल रही हैं। बेली ब्लड बैंक में शुक्रवार सुबह नंबर लगाने पर रात आठ बजे उन्हें दो यूनिट प्लेटलेट्स मिल सकी।
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ये दो मामले तो बानगी भर हैं। सच्चाई तो यह है कि शहर में डेंगू मरीजों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कई गुना ज्यादा है। सीएमओ दफ्तर से बताई जा रही मरीजों की संख्या भले ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच के बाद पुख्ता मान ली जाए, लेकिन प्लेटलेट्स के लिए परेशान लोगों को देखकर डेंगू की भयावहता का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। अब हाल यह है कि मरीज के तीमारदार डोनर लाते हैं, रक्तदान कराते है, फिर चार से छह घंटे बाद उन्हें प्लेटलेट्स मिल पा रही हैं।