फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Pitru Paksha: Pind Daan for salvation will be done for a fortnight on the banks of Sangam

पितृपक्ष: संगम तट पर पखवारे भर होगा मोक्ष के लिए पिंडदान

Mon, 20 Sep 2021 01:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 20 Sep 2021 01:20 AM IST
सार

पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ कल से शुरू होगा पितृपक्ष, पिंडदान और तर्पण-अर्पण से तृप्त होंगे पूर्वज

विज्ञापन
Pitru Paksha: Pind Daan for salvation will be done for a fortnight on the banks of Sangam
पितृपक्ष की शुरुआत से पहले ही संगम तट पर श्राद्ध कर्म के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। - फोटो : prayagraj

विस्तार

पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ कल से शुरू होगा पितृपक्ष, पिंडदान और तर्पण-अर्पण से तृप्त होंगी पूर्वजों की आत्माएं इस दौरान पिंडदान के साथ ही अन्न, वस्त्र और पूर्वजों की प्रिय वस्तुओं का भी दान होगा। पितृपक्ष आरंभ होने से पहले ही तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर वंशजों की भीड़ लगने लगी है। पितरों को समर्पित इस पक्ष में सात पीढ़ियों के नाम से तर्पण-अर्पण और श्राद्ध होगा।
विज्ञापन


गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर पितृपक्ष में श्राद्ध और पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मिलने की पौराणिक अवधारणा रही है। माना जाता है कि संगम तट पर पिंडदान करने से पितरों को शांति मिल जाती है। ऐसे में सोमवार को पूर्णिमा तिथि पर सुबह से ही संगम तट पर पिंडदान, तर्पण का सिलसिला शुरू होगा। पूर्णिमा पर अकाल मृत्यु की वजह से भटकती आत्माओं की शांति के लिए विधि-विधान से पूजन और पिंडदान की परंपरा है।
विज्ञापन


ऐसे में संगम तट पर पिंडदान के लिए देश के कई हिस्सों से लोग पहुंचेंगे। वेदियों पर ध्वजा, पताका सजाकर मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और तर्पण कर अपने पूर्वजों को लोग श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। पुराणों के अनुसार त्रिवेणी संगम पर पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। यहां तर्पण और पिंडदान किए बिना दिवंगत की आत्मा अतृप्त रहती है। पितृपक्ष में पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिंडदान नहीं करने से वंशजों को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि देश भर से लोग लोग पिंडदान के लिए संगमनगरी पहुंच रहे हैं। तीर्थ पुरोहित राजमणि तिवारी बताते हैं कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए पितृपक्ष की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार पितृदोष से मुक्ति के बिना परिवार में सुख-समृद्धि नहीं आती। ऐसे में किसी की अकाल मृत्यु, माता-पिता व मातृ-पितृ पक्ष के किसी अन्य परिजन की मृत्यु के श्राद्ध और पिंडदान करने के ही दोष से मुक्ति मिलती है।



पूर्णिमा का प्रथम श्राद्ध आज
 सोमवार को पूर्णिमा का पहला श्राद्ध होगा। इसी के साथ पितृपक्ष शुरू हो जाएगा। 21 को प्रतिपदा होगी। इसी क्रम में 22 को द्वितीया, 23 को तृतीया, 24 को चतुर्थी, 25 को पंचमी, 26 को षष्ठी, 27 को सप्तमी, 28 को कोई श्राद्ध नहीं होगा। 29 को अष्टमी, 30 को मातृ नवमी, एक अक्तूबर को दशमी, दो को एकादशी, तीन को द्वादशी, चार को त्रयोदशी, पांच को चतुर्दशी और छह अक्तूबर को अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed