फूलपुर विधानसभा : जातीय समीकरण में बंध गया कमल और साइकिल की रेस का रोमांच, गुणा भाग में जुटे सियासी पंडित
बसपा का हाथी भी इस बार आगे निकलने की होड़ में है। मतदान के अगले दिन सभी राजनीतिक दलों के सियासी धुरंधर चुनावी गुणा भाग करते नजर आए। इस बार प्रमुख दलों के सामने नई चुनौतियां पेश आईं तो कहीं उन्हें फायदा भी मिला।
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सियासी सरजमीं पर सियासत कौन सी करवट बैठेगी इसके लिए शनिवार 23 नवंबर की दोपहर तक का इंतजार करना होगा। फूलपुर विधानसभा उपचुनाव में हुए मतदान में इस बार कम मत प्रतिशत चर्चा का विषय है। कमल और साइकिल की रेस का रोमांच इस बार जातीय समीकरणों में बंधा दिख रहा है।
बसपा का हाथी भी इस बार आगे निकलने की होड़ में है। मतदान के अगले दिन सभी राजनीतिक दलों के सियासी धुरंधर चुनावी गुणा भाग करते नजर आए। इस बार प्रमुख दलों के सामने नई चुनौतियां पेश आईं तो कहीं उन्हें फायदा भी मिला।
माहौल ऐसा रहा कि तमाम मतदाताओं ने मौन तोड़कर अपनी बात सफाई से बता दी। तर्क दिया कि वह क्यों किसके साथ हैं। खेमेबंदी अलग तरह की दिखाई दी। बृहस्पतिवार को सपा और भाजपा के तमाम पदाधिकारी बूथों से मिली रिपोर्ट की समीक्षा करते नजर आए।
कोटवा, जमनीपुर, हनुमानगंंज, जलालपुर, अंदावा, सहसों, फूलपुर बाजार, हेता पट्टी आदि के बूथों की गहन समीक्षा हुई। इसमें पाया गया कि साइकिल कहीं बहुत तेज दौड़ी तो कहीं भाजपा के लिए सूखी कही जाने वाली धरती पर कमल की पंखुड़ियां खिलती दिखीं।
आजाद समाज पार्टी पहली बार यहां उपचुनाव में दस्तक देती दिखाई दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अशोक बाजपेयी ने बताया कि वर्तमान में फूलपुर और पूर्व में झूंसी विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी हद तक जातीय समीकरण के आधार पर ही आते हैं।
लोकसभा चुनाव के दौरान यहां कुर्मी, मौर्य, पाल, सवर्ण आदि बिरादरी के वोटरों में बिखराव देखने को मिला, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। यह भी जानकारी मिली है कि यादव और मुस्लिम बहुल बूथों पर भी उपचुनाव की वजह से मत प्रतिशत कम रहा। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। वहीं, सपा के वरिष्ठ नेता दान बहादुर मधुर का दावा है कि जिन बूथों पर पिछले चुनाव में भाजपा जीती वहां इस बार आधे से भी कम मत पड़े। भाजपा के समर्थकों में उत्साह नहीं दिखा। इसका फायदा इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को मिलना तय है।
नतीजे से तय होगा सांसद प्रवीण पटेल का कद
विधानसभा उपचुनाव का नतीजा फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल के सियासी कद का भी निर्धारण करेगा। पटेल सांसद बनने के पूर्व इस विधानसभा से लगातार दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में इस विधानसभा सीट पर पहली बार कमल खिलाया, लेकिन 2022 के चुनाव में सपा प्रत्याशी मुजतबा सिद्दीकी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी, बाद में प्रवीण मामूली अंतर से चुनाव जीते।
हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान फूलपुर विधानसभा सीट पर प्रवीण पटेल सपा प्रत्याशी से काफी पिछड़ गए। विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी की शहर उत्तरी विधानसभा सीट ने अगर प्रवीण को बड़ा मार्जिन न दिया होता तो इस लोकसभा सीट पर भी इंडिया गठबंधन का ही कब्जा होता।फूलपुर विधानसभा उपचुनाव के प्रभारी केशव प्रसाद मौर्य ने उपचुनाव को लेकर यहां प्रत्याशी का नाम घोषित होने से पहले ही अपनी बड़ी टीम यहां उतार दी थी।
इस टीम के अहम सदस्यों में सांसद प्रवीण पटेल भी शामिल रहे। प्रवीण भी चुनाव के दौरान पूरी तरह सक्रिय दिखे। उनकी सक्रियता प्रभावी रही या नहीं वह मतगणना होने के बाद स्पष्ट हो जाएगा।
अगर भाजपा प्रत्याशी दीपक पटेल चुनाव जीतते हैं तो संगठन में प्रवीण का कद बढ़ सकता है और परिणाम विपरीत रहा तो सांसद होने के बावजूद उनपर तमाम तरह के सवाल भी खड़े हो सकते हैं।भाजपा प्रदेश कार्य समिति के पूर्व सदस्य सुबोध सिंह कहते हैं कि चुनाव में भाजपा को हर बिरादरी का भरपूर वोट मिला। सांसद समेत तमाम विधायक दिन-रात जुटे रहे। वैसे भी उपचुनाव के नतीजे से किसी भी जनप्रतिनिधि के कद का आकलन नहीं किया जा सकता।
दीपक ने परिवार संग बिताया समय, मुजतबा पार्टी नेताओं से मिले
कई दिनों तक प्रचार के बाद भाजपा प्रत्याशी दीपक पटेल ने बृहस्पतिवार को पूरा समय मां एवं पूर्व सांसद केशरी देवी पटेल और परिवार के सदस्यों के बीच बिताया। लंबे समय बाद उन्होंने परिजनों के साथ ही दोपहर का भोजन किया। कुछ देर के लिए वह पार्टी कार्यालय भी गए। वहां मतगणना के लिए चुने गए एजेंटों की बैठक में शामिल हुए।
दीपक ने बताया कि शाम को पार्टी के तमाम नेताओं से उन्होंने घर पर ही मुलाकात की। वहीं, सपा प्रत्याशी मुजतबा सिद्दीकी सुबह पांच बजे सोकर उठे। नमाज पढ़ने के बाद सुबह की चाय उन्होंने परिजनों के साथ पी। बेटे अशदउल्ला सिद्दीकी, भतीजे नरुल सिद्दीकी के साथ वह सुबह दस बजे फूलपुर पहुंचे। वहां अपने पेट्रोल पंप पर कुछ समय व्यतीत करने के बाद वह चुनाव कार्यालय पहुंचे। वहां एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव, अनिल यादव के साथ काफी देर उन्होंने बूथवार समीक्षा की।