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बराक ओबामा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Wed, 01 Apr 2015 12:02 AM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। बराक ओबामा पर भारत की धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। याचिका में न्यायिक मजिस्ट्रेट के नौ फरवरी 2015 के आदेश को चुनौती दी गई है। मजिस्ट्रेट ने याची की इस अर्जी को खारिज कर दिया था।
अधिवक्ता सुशील मिश्र द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका में कहा गया है कि बराक ओबामा ने अपने दिल्ली दौरे के समय और अमेरिका में चार फरवरी 2015 को नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में भारत की धार्मिक सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बयान दिया है। इससे करोड़ों भारतीयों की मानहानि होती है इसलिए उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 500 के तहत मुकदमा चलाया जाए।
याची का कहना है कि इलाहाबाद के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनकी अर्जी गलत आधारों पर खारिज की है। उन्होंने बराक ओबामा के विदेशी राष्ट्राध्यक्ष होने के आधार पर अर्जी स्वीकार नहीं की। जबकि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत भारत के राष्ट्रपति और राज्यपालों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही वर्जित है। इसमें विदेशी राष्ट्राध्यक्षों पर कार्यवाही की रोक नहीं है। याची का कहना है कि भारतीय कानून में विदेशी राष्ट्राध्यक्ष पर मुकदमा चलाने की रोक नहीं है।
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अधिवक्ता सुशील मिश्र द्वारा दाखिल पुनरीक्षण याचिका में कहा गया है कि बराक ओबामा ने अपने दिल्ली दौरे के समय और अमेरिका में चार फरवरी 2015 को नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में भारत की धार्मिक सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बयान दिया है। इससे करोड़ों भारतीयों की मानहानि होती है इसलिए उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 500 के तहत मुकदमा चलाया जाए।
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याची का कहना है कि इलाहाबाद के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनकी अर्जी गलत आधारों पर खारिज की है। उन्होंने बराक ओबामा के विदेशी राष्ट्राध्यक्ष होने के आधार पर अर्जी स्वीकार नहीं की। जबकि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत भारत के राष्ट्रपति और राज्यपालों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही वर्जित है। इसमें विदेशी राष्ट्राध्यक्षों पर कार्यवाही की रोक नहीं है। याची का कहना है कि भारतीय कानून में विदेशी राष्ट्राध्यक्ष पर मुकदमा चलाने की रोक नहीं है।
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