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कायम रहा अमन-चैन, भाईचारा

Sun, 10 Nov 2019 02:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 02:15 AM IST
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Peace prevails, brotherhood
Peace prevails, brotherhood - फोटो : ALDCOMPACT
और कायम ही रहा आपसी भाईचारा, अमन चैन
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0 पुराने शहर खासकर मुस्लिम मोहल्लों में सबकुछ रहा ‘ओके’
प्रयागराज। गंगा-जमुनी तहजीब वाले शहर इलाहाबाद के बारे में शायर मुनव्वर राना का कहा, ‘गले मिलते हैं मौसम से जहां मौसम दिखाएंगे, इलाहाबाद आना हम तुम्हें संगम दिखाएंगे’ शनिवार को फिर सच हुआ। राम मंदिर पर सुप्रीम फैसले के आने से पहले शहर की फिज़ा में भले ही तरह-तरह की आशंकाएं घुली हुई थीं लेकिन फैसला आने के बाद दोनों ही पक्षों की सूझबूझ और आपसी भाईचारे से ये आशंकाएं जाने कहां काफूर हो गईं।
पुराने शहर, खासकर मुस्लिम इलाकों में कहीं-कहीं मामूली खामोशी भले रही लेकिन सामान्य दिनों की तरह ही चाय-पान सहित अन्य छोटी-बड़ी दुकानें खुलीं। जुटे पड़ोसियों में वैसी ही लंतरानी, बकैती चलती रही। इस बीच कहीं किसी ने राम मंदिर मुद्दा कुरेदा भी तो दूसरे ने अगले ही पल चर्चा का रुख बदल दिया। गीतकार वसु मालवीय भी याद आए, ‘वो सेवइयां प्यार से लाना टिफिन में, दस मुलाकातें हमारी एक दिन में, आज भी ताजा जेहन में, कुछ नहीं है हुआ मन में’ और ऐसा ही रहा। रोजमर्रा की तरह ही लोग एक दूसरे के साथ दफ्तर गए, साथ टिफिन साझा किया और एक दूसरे के मददगार बने रहे।
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दरियाबाद से लेकर अटाला, रसूलपुर, दायराशाह अजमल, बक्शी बाजार, रानीमंडी, पत्थर गली, नूरुल्लाह रोड, करेली, गौसनगर, शाहगंज, मोहत्सिमगंज, अकबरपुर, नखासकोहना सहित तमाम मुस्लिमबहुल मोहल्लों में न कोई तनाव नजर आया, न ही किसी के चेहरे पर दहशत की लकीरें ही दिखीं। दरियाबाद पीपल चौराहे पर निहाल हुसैन का चायखाना हो, चिकवन टोला का हसन टी स्टाल या फिर कब्रिस्तान के सामने बांस बल्ली की टाल नजीब इलाहाबादी, बाकर नकवी सहित मोहल्ले के तमाम लोग दरियाबाद से लेकर देश तक की गुफ्तगू में रोममर्रा की तरह मशगूल दिखे।
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अंजुमन नकविया के अध्यक्ष हाजी सैयद अजादार हुसैन ने शिया वक्फ बोर्ड की अपील को खारिज करने सहित समूचे फैसले का स्वागत किया। शाहगंज में बन्ने चाय वाले की दुकान पर रोजमर्रा की तरह की शनिवार को भी पानदरीबा के प्रजापति, लल्लू टेलर सहित कबूतरबाजी के संयोजक मुन्नू भाई, भइय्यन भाई, अजीम आदि ने उसी भाईचारगी के साथ चाय की चुस्कियां लीं और एक दूसरे के दुख-मुसीबतों में साथ रहने का वायदा दोहराया।

अटाला चौराहे पर बैठे व्यापार मंडल अध्यक्ष फैय्याज अहमद कुरैशी ने कहा, अमन की कोशिशों में तमाम हिंदू भाई हमारे साथ हैं। इंशाअल्लाह! अमन में खलल का सवाल ही नहीं पैदा होता है। रसूलपुर में मोबाइल की दुकान पर बैठे दोस्तों फैजान, नसीरुद्दीन, सरवर ने कहा, सबसे बड़ा सुकून है कि एक मुद्दा खत्म हुआ जो दशकों से देश के अमन-चैन के लिए नासूर बना था। वहीं नूरुल्लाह रोड और नखासकोहना पर रात को होने वाली बैठकें भी रोजमर्रा की तरह हुईं लेकिन चर्चा के केंद्र से राम मंदिर बाहर रहा।
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