माफिया की अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई के क्रम में मंगलवार को पीडीए का बुलडोजर झूंसी के छतनाग गांव स्थित हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव के दो मकानों पर चला। पीडीए की दलील थी कि दोनों मकानों का निर्माण बगैर नक्शा पास कराए किया गया था। अशोक के मकान को ढहाने से पहले उसे खाली कराया गया। सुबह साढ़े ग्यारह बजे से शुरू हुई कार्रवाई दोपहर ढाई बजे तक चली। कार्रवाई से पहले छतनाग मार्ग के दोनों रास्तों को सील कर दिया गया था।
झूंसी में हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव के दो मकानों पर चला पीडीए का बुलडोजर, जमींदोज
झूंसी के छतनाग गांव निवासी अशोक यादव हिस्ट्रीशीटर के साथ ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी रहा है। इस वक्त उसकी पत्नी शशि देवी गांव की प्रधान भी है। छतनाग गांव के मिलन तिराहे के पास अशोक के तकरीबन 150 तथा 600 वर्गगज में दो मकान आमने-सामने बने थे। 150 वर्गगज के दो मंजिल मकान में अशोक अपने परिवार के साथ रहता था।
मंगलवार को पीडीए का दस्ता पूर्वान्ह 11.30 बजे दो बुलडोजर लेकर छतनाग गांव के मिलन तिराहेे पर स्थित अशोक यादव के घर पर पहुंचा। पीडीए के दस्ते के साथ जोनल अधिकारी शिवानी सिंह तथा सत शुक्ला, एसडीएम फूलपुर युवराज सिंह व कई थानों की पुलिस फोर्स भी मौके पर मौजूद रही। लगभग तीन घंटे तक चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में दोनों मकान जमींदोज कर दिए गए। जोनल अधिकारी सत शुक्ला ने बताया कि मकानों का निर्माण पीडीए से बगैर नक्शा पास कराए किया गया था। इसी वजह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
अशोक पर दर्ज हैं कुल 16 मुकदमे
हिस्ट्रीशीटर एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव पर अकेले झूंसी थाने में ही हत्या, हत्या के प्रयास व गैंगस्टर एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में कुल 16 मुकदमे दर्ज हैं। अशोक पर 1993 में पहला केस दर्ज किया गया था। इसके बाद 96, 98, 2003, 2004, 2005, 2016 व 2020 में आर्म्स एक्ट समेत कुल 16 केस दर्ज किए गए। इस समय वह जमानत पर छूटा हुआ है।
ग्रामीण और समर्थकों ने लगाए नारे, जताया विरोध
कार्रवाई का विरोध करते हुए अशोक समर्थकों ने प्रशासन व शासन के खिलाफ जमकर नारे लगए। उनका कहना था कि उक्त मकान अशोक नहीं बल्कि उत्नी पत्नी शशि देवी के नाम से था। अशोक के भाई जिला पंचायत सदस्य शिवनारायण यादव घुन्नू का कहना है 150 वर्गगज में बने दो मंजिले मकान का निर्माण तकरीबन चालीस साल पहले किया गया था। ऐसे में अब भवन का नक्शा पास न होने की दलील देकर गिराया जाना, समझ से परे है। आक्रोशित समर्थकों और ग्रामीणों को पुलिस ने वहां से समझाकर हटाया।